Q2 FY27 के नतीजों में भारतीय IT कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। जहां हेल्थकेयर और फाइनेंशियल सर्विसेज ने सहारा दिया, वहीं रिटेल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में खर्च में कटौती से ग्रोथ प्रभावित हुई है।
भारतीय IT सेक्टर के Q2 FY27 के नतीजे यह साफ करते हैं कि पूरे सेक्टर में ग्रोथ एक जैसी नहीं है। कंपनियों का रेवेन्यू अब पूरी तरह इस बात पर निर्भर है कि वे किन क्लाइंट्स और सेवाओं पर फोकस कर रही हैं।
हेल्थकेयर में चुनिंदा कंपनियों का जलवा
हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज सेक्टर में ग्रोथ के संकेत जरूर दिखे, लेकिन यह पूरी इंडस्ट्री में एक जैसा नहीं है। नतीजों में 32.5% की शानदार ग्रोथ के साथ Infosys जैसे लीडर्स का प्रदर्शन हावी रहा। अगर इन लीडर्स को हटा दिया जाए, तो बाकी इंडस्ट्री का प्रदर्शन काफी कमजोर दिखता है। इसका मतलब यह है कि इस सेक्टर में ग्रोथ व्यापक नहीं है, बल्कि यह सिर्फ बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने वाली कंपनियों तक ही सीमित है।
BFSI का भरोसा बरकरार
Financial Services यानी BFSI अभी भी IT कंपनियों की सबसे बड़ी मजबूती है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, रेगुलेटरी कंप्लायंस और ऑपरेशनल मॉर्डनाइजेशन जैसे प्रोजेक्ट्स के कारण यहां लगातार डिमांड बनी हुई है। हालांकि ग्रोथ की रफ्तार पहले से कम हुई है, लेकिन बड़े IT प्लेयर्स के लिए रेवेन्यू का यह सबसे अहम जरिया बना हुआ है।
रिटेल और टेक्नोलॉजी में चुनौती
इसके उलट, रिटेल और टेक्नोलॉजी सेगमेंट में काफी दबाव देखा गया। नॉर्थ अमेरिका और यूरोप के क्लाइंट्स ने नॉन-एसेंशियल खर्चों में भारी कटौती की है, जिससे कुछ कंपनियों के रेवेन्यू में बड़ी गिरावट आई है। इस सुस्ती से निपटने के लिए अब IT कंपनियां 'एजेंटिक AI' (Agentic AI) और 'गवर्नेंस-लेड डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन' जैसे नए क्षेत्रों में दांव लगा रही हैं।
इन्वेस्टर्स के लिए सीख यही है कि अब सिर्फ सेक्टर के नाम पर शेयर न चुनें। कंपनियों का रेवेन्यू मिक्स चेक करना बेहद जरूरी है कि वे BFSI जैसे स्टेबल सेगमेंट्स में कितनी मजबूत हैं और रिटेल जैसे वोलेटाइल सेगमेंट्स से उन्हें कितना रिस्क है।
