Indian IT: AI की ओर बड़ा कदम, कमाई का मॉडल बदला

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian IT: AI की ओर बड़ा कदम, कमाई का मॉडल बदला

भारतीय आईटी सेक्टर अब इंसानों पर आधारित काम से AI-संचालित मॉडल की ओर बढ़ रहा है। 2030 तक **$300-400 बिलियन** के बाज़ार का लक्ष्य है। TCS और Fractal जैसी कंपनियां AI से कमाई बढ़ा रही हैं, लेकिन निवेशकों को नए प्राइसिंग मॉडल और पुराने सर्विस मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव पर नज़र रखनी होगी।

इंसानी मेहनत से AI-संचालित नतीजों तक

भारतीय आईटी सर्विस इंडस्ट्री एक बड़ा बदलाव देख रही है। कंपनियां अब इंसानों पर निर्भरता कम करके AI और इंटेलिजेंस-बेस्ड नतीजों पर फोकस कर रही हैं। यह लंबे समय की ग्रोथ के लिए ज़रूरी है, लेकिन यह टेक्नोलॉजी कंपनियों के पैसे चार्ज करने और काम करने के तरीके को बदल रहा है।

टाइम-आधारित से रिजल्ट-आधारित कीमत का मॉडल

कई सालों से, भारतीय आईटी कंपनियां इस मॉडल पर काम कर रही थीं कि प्रोजेक्ट पर कितने लोग लगे हैं, इसी के हिसाब से कमाई होती थी। इसे 'टाइम-एंड-मटेरियल' प्राइसिंग कहते थे। लेकिन अब यह तेज़ी से बदल रहा है। कंपनियां अब AI इन्वेस्टमेंट से मिलने वाले बिजनेस रिटर्न को देखना चाहती हैं। इसलिए, बड़ी कंपनियां अब 'आउटकम-बेस्ड' मॉडल की ओर जा रही हैं, जहाँ पेमेंट AI सिस्टम से मिलने वाले वैल्यू पर आधारित होगी, न कि काम करने के घंटों पर।

इस बदलाव में कुछ जोखिम भी हैं। खासकर ट्रेडिशनल मैनेज्ड सर्विसेज, जो बड़ी आईटी कंपनियों की कमाई का 22% से 45% हिस्सा हैं, उनमें मंदी आ सकती है क्योंकि ऑटोमेशन से मैन्युअल काम कम हो रहा है। इस बदलाव के कारण एंट्री-लेवल हायरिंग में भी कमी आई है, क्योंकि कंपनियां ट्रेडिशनल कोडिंग स्किल्स की बजाय AI-नेटिव टूल्स में माहिर लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं।

AI से कमाई और बाज़ार का प्रदर्शन

कुछ कंपनियां इस बदलाव के संकेत दिखा रही हैं। Tata Consultancy Services (TCS) ने 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए $2.6 बिलियन के सालाना AI रेवेन्यू की रिपोर्ट दी, जो पिछली तिमाही से 13.6% ज़्यादा है। यह ग्रोथ कंपनी की AI को मौजूदा सर्विस लाइनों में इंटीग्रेट करने की क्षमता को दर्शाती है।

Fractal Analytics भी खास एंटरप्राइज AI सॉल्यूशंस के लिए मज़बूत मांग देख रही है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹912.5 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल से 20% ज़्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹72.3 करोड़ हो गया। ये आंकड़े दिखाते हैं कि जो कंपनियां AI को बिजनेस प्रोसेस में सफलतापूर्वक इंटीग्रेट कर पा रही हैं, वे नया ग्रोथ हासिल कर रही हैं, भले ही पूरा सेक्टर उतार-चढ़ाव वाले बाज़ार माहौल से गुज़र रहा हो।

निवेशकों के लिए आगे का रास्ता

इंडस्ट्री 2030 तक $300-400 बिलियन के बड़े अवसर का अनुमान लगा रही है, लेकिन नज़दीकी भविष्य अभी भी मिला-जुला है। Nifty IT इंडेक्स, जिसने 2026 की शुरुआत में AI-ऑटोमेशन को लेकर चिंता के कारण काफी उतार-चढ़ाव देखा था, जुलाई के बाद से स्थिरता और आंशिक सुधार के संकेत दिखा रहा है। हालांकि, सेक्टर के विकास का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां कितनी तेज़ी से AI के शुरुआती कामों (पायलट) से आगे बढ़कर मुनाफ़ा देने वाले, तैयार सॉल्यूशंस डिलीवर कर पाती हैं।

निवेशकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि इस बदलाव का ऑपरेटिंग मार्जिन पर क्या असर पड़ता है। जैसे-जैसे कंपनियां AI क्षमता बनाने पर भारी खर्च कर रही हैं और पुरानी सर्विस रेवेन्यू में गिरावट को मैनेज कर रही हैं, उनकी मुनाफ़ा बचाने की क्षमता सफल एडाप्टेशन का मुख्य संकेत होगी। यह भी देखना होगा कि आने वाली तिमाहियों में क्लाइंट के फैसले लेने की प्रक्रियाएं कितनी तेज़ या धीमी होती हैं, जिससे सेक्टर में AI एडॉप्शन की गति का अंदाज़ा लगेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.