AI का सुरक्षित इस्तेमाल ही IT लीडर्स की पहली पसंद, साइबर सिक्योरिटी अब ग्रोथ का बड़ा हथियार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
AI का सुरक्षित इस्तेमाल ही IT लीडर्स की पहली पसंद, साइबर सिक्योरिटी अब ग्रोथ का बड़ा हथियार

भारत के एंटरप्राइज लीडर्स अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाते वक्त साइबर सिक्योरिटी पर सबसे ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं. वे इसे अपनी कंपनी की ग्रोथ का एक अहम हिस्सा मान रहे हैं. यह बदलाव दिखाता है कि भारतीय कंपनियाँ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में कैसे निवेश कर रही हैं, जिसका सीधा असर देश के टेक-सर्विसेज सेक्टर के भविष्य पर पड़ेगा.

भारत की तेज़ी से डिजिटल होती अर्थव्यवस्था, टेक्नोलॉजी लीडर्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सिक्योरिटी को लेकर अपने नज़रिए को फिर से परिभाषित करने पर मजबूर कर रही है. हाल ही में चीफ इनफॉर्मेशन ऑफिसर्स (CIOs) और चीफ इनफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर्स (CISOs) के बीच हुई इंडस्ट्री चर्चाओं से एक बड़ा बदलाव साफ नज़र आता है: AI अब सिर्फ एक एक्सपेरिमेंटल टेक्नोलॉजी नहीं रह गई है, बल्कि यह बिज़नेस का एक फंडामेंटल ड्राइवर बन रही है. वहीं, साइबर सिक्योरिटी, जो पहले सिर्फ एक बैक-ऑफ़िस सपोर्ट फंक्शन थी, अब एक स्ट्रेटेजिक ग्रोथ इनेबलर के तौर पर उभर रही है.

AI को अपनाने में आया स्ट्रेटेजिक बदलाव

कई भारतीय कंपनियों के लिए, अकेले पायलट प्रोजेक्ट्स चलाने का दौर अब बीत चुका है. कंपनियाँ अब AI को सीधे अपने मुख्य ऑपरेशन्स में इंटीग्रेट कर रही हैं, जिसमें ऑटोमेटेड डिसिज़न-मेकिंग से लेकर कस्टमर एक्सपीरियंस मैनेजमेंट तक सब शामिल है. डेटा का यह लोकतांत्रीकरण, जहाँ टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल दोनों तरह के कर्मचारी AI के साथ इंटरैक्ट करते हैं, एक मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग करता है. कॉर्पोरेट इंडिया की प्राथमिकता अब सिर्फ AI को अपनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यह 'ट्रस्टेड AI' हो - यानी ऐसे सिस्टम जो भरोसेमंद, लचीले हों और बिज़नेस की निरंतरता को खतरे में डाले बिना भारी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करने में सक्षम हों.

साइबर सिक्योरिटी: बिज़नेस को आगे बढ़ाने का ज़रिया

जैसे-जैसे कंपनियाँ AI को हाइब्रिड क्लाउड और मल्टी-क्लाउड एनवायरनमेंट्स में इंटीग्रेट कर रही हैं, साइबर खतरों का परिदृश्य स्वाभाविक रूप से चौड़ा हो गया है. टेक लीडर्स पा रहे हैं कि पारंपरिक, बिखरे हुए सिक्योरिटी आर्किटेक्चर इस जटिलता को संभालने के लिए अब पर्याप्त नहीं हैं. इंडस्ट्री का ध्यान अब इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म्स की ओर मुड़ रहा है जो लेगेसी सिस्टम्स और नए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में यूनिफाइड विज़िबिलिटी प्रदान करते हैं.

साइबर सिक्योरिटी खर्च को सिर्फ कंप्लायंस की लागत के तौर पर देखने के बजाय, भारतीय बिज़नेस अब कस्टमर का भरोसा और बिज़नेस की रेज़िलिएंस बनाने के लिए मज़बूत सिक्योरिटी फ्रेमवर्क का फायदा उठा रहे हैं. यह भारतीय IT सर्विस सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जो हाई-एंड सिक्योरिटी कंसल्टिंग और AI इंटीग्रेशन सर्विसेज की मज़बूत डिमांड देख रहा है. जैसे-जैसे कंपनियाँ बिज़नेस कंटिन्यूटी और रैपिड रिकवरी प्लान्स को प्राथमिकता दे रही हैं, सोफिस्टिकेटेड, मैनेज्ड सिक्योरिटी सर्विसेज की डिमांड टेक प्रोवाइडर्स के लिए फोकस का एक अहम क्षेत्र बने रहने की उम्मीद है.

ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटी को मैनेज करना

ऑन-प्रिमाइसेस लेगेसी इंफ्रास्ट्रक्चर और मॉडर्न मल्टी-क्लाउड सेटअप के मिश्रण को मैनेज करना भारतीय CIOs के लिए एक बड़ी ऑपरेशनल चुनौती बनी हुई है. इंडस्ट्री अब स्पेशलाइज्ड, स्टैंडअलोन सिक्योरिटी टूल्स को जमा करने के ट्रेंड से दूर जा रही है, जिससे अक्सर 'टूल स्पॉल' और ऑपरेशनल इनएफिशिएंसी होती है. इसके बजाय, वर्तमान ज़ोर फंडामेंटल्स पर वापस लौटने का है: डेटा, आइडेंटिटी और नेटवर्क एक्सेस पर मज़बूत कंट्रोल सुनिश्चित करना.

निवेशकों और मार्केट वॉचर्स के लिए, ये ट्रेंड्स टेक सेक्टर में एक बदलाव को दर्शाते हैं. बिज़नेस ऑब्जेक्टिव्स और सिक्योरिटी मैंडेट्स लगातार संरेखित हो रहे हैं, जिसका मतलब है कि भविष्य का IT खर्च संभवतः एक्सपेरिमेंटल टेक के बजाय स्पष्ट बिज़नेस आउटकम देने वाले प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित होगा. भारतीय IT फर्म्स की AI स्केलेबिलिटी और साइबर रेज़िलिएंस दोनों को संबोधित करने वाले इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस पेश करने की क्षमता आने वाली तिमाहियों में इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए एक महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल (निगरानी योग्य) होगी.

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.