Indian IT Firms: अब हायरिंग नहीं, प्रोडक्टिविटी पर फोकस! TCS, Tech Mahindra कर रहे कमाल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian IT Firms: अब हायरिंग नहीं, प्रोडक्टिविटी पर फोकस! TCS, Tech Mahindra कर रहे कमाल

भारत की टॉप IT कंपनियां अब ज्यादा लोगों को नौकरी देने की बजाय मौजूदा कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं। TCS और Tech Mahindra जैसी कंपनियों ने कम कर्मचारियों के साथ भी रेवेन्यू प्रति कर्मचारी (Revenue Per Employee) बढ़ाया है, जो AI और बेहतर यूटिलाइजेशन का नतीजा है।

IT सेक्टर में आया बड़ा बदलाव: हायरिंग की दौड़ से प्रोडक्टिविटी की ओर

भारतीय IT सर्विस सेक्टर अब उस बिजनेस मॉडल से आगे बढ़ रहा है जिसमें सिर्फ ज्यादा से ज्यादा लोगों को नौकरी पर रखा जाता था। अब फोकस है कि हर कर्मचारी से अधिकतम आउटपुट कैसे लिया जाए। जून तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी IT कंपनियां अब सिर्फ हेडकाउंट बढ़ाने की बजाय एफिशिएंसी, ऑटोमेशन और AI को अपनाकर रेवेन्यू बढ़ा रही हैं।

टॉप IT कंपनियों की प्रोडक्टिविटी ग्रोथ

बड़ी IT कंपनियों ने इस बदलाव को अलग-अलग तरीकों से अपनाया है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) ने ऑपरेशनल डिसिप्लिन पर जोर दिया है। जून तिमाही में TCS के वर्कफोर्स में पिछले साल के मुकाबले 3.1% की कमी आई, लेकिन रेवेन्यू प्रति कर्मचारी 6.1% बढ़ गया। वहीं, टेक महिंद्रा के कर्मचारियों की संख्या 1.2% घटी, पर रेवेन्यू प्रति कर्मचारी 7.4% की बढ़ोतरी के साथ बढ़ा। यह दिखाता है कि कंपनियां या तो कम कर्मचारियों को मैनेज कर रही हैं, प्रोजेक्ट्स का बेहतर यूटिलाइजेशन कर रही हैं, या AI ऑटोमेशन का फायदा उठा रही हैं।

इसके विपरीत, कुछ कंपनियों ने टीम का साइज़ बढ़ाते हुए भी प्रोडक्टिविटी में सुधार किया है। इन्फोसिस (Infosys) ने 1.3% हेडकाउंट बढ़ाया और रेवेन्यू प्रति कर्मचारी 1.5% बढ़ा। HCLTech ने भी 0.3% कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई, साथ ही रेवेन्यू प्रति कर्मचारी में 2.6% की ग्रोथ दर्ज की। कंपनियों का कहना है कि वे फ्रेश ग्रेजुएट्स की हायरिंग जैसे अनुशासित भर्ती के तरीके अपनाकर ग्रोथ और एफिशिएंसी के बीच संतुलन बना रहे हैं।

स्केलिंग और यूटिलाइजेशन की चुनौतियाँ

सभी कंपनियों को वर्कफोर्स में बदलाव का तुरंत फायदा नहीं मिला है। टियर-II कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। Mphasis ने हेडकाउंट और रेवेन्यू एफिशिएंसी, दोनों में बढ़त हासिल की, जहाँ रेवेन्यू प्रति कर्मचारी 11.2% बढ़ा और कर्मचारियों की संख्या 3.3%। लेकिन, Wipro और L&T टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बावजूद रेवेन्यू प्रति कर्मचारी में क्रमशः 3.9% और 8.4% की गिरावट आई। यह दिखाता है कि कुछ कंपनियां भविष्य की मांग को देखते हुए टैलेंट में निवेश कर रही हैं, जिससे अस्थायी रूप से प्रोडक्टिविटी मेट्रिक्स पर दबाव पड़ सकता है।

एफिशिएंसी और AI का रोल

इंडस्ट्री एनालिस्ट्स का मानना है कि रेवेन्यू प्रति कर्मचारी अब सिर्फ स्केल का नहीं, बल्कि डिलीवरी ऑप्टिमाइजेशन का मेट्रिक बन गया है। जो कंपनियां ज्यादा प्रोडक्टिविटी हासिल कर रही हैं, वे अक्सर क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसी हाई-वैल्यू सर्विसेज पर फोकस कर रही हैं। AI अभी अपने आप में ग्रोथ का बड़ा इंजन नहीं है, लेकिन यह रूटीन कामों को ऑटोमेट करके प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का काम कर रहा है, जिससे डेवलपर्स ज्यादा अहम काम कर पा रहे हैं। इन्वेस्टर्स अब इस बात पर नज़र रखेंगे कि यह बदलाव आने वाली तिमाहियों में ऑपरेटिंग मार्जिन को कैसे प्रभावित करता है और कंपनियां AI-संचालित एफिशिएंसी की जरूरत को भविष्य की संभावित मार्केट डिमांड रिकवरी की तैयारी के साथ कैसे संतुलित करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.