अमेरिका में मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद से भारतीय IT सेक्टर के लिए राह मुश्किल हो गई है। TCS और Infosys समेत कई दिग्गज कंपनियां अक्टूबर 2026 से लागू PERM लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के सस्पेंशन से जूझ रही हैं, जिसके कारण अब उन्हें अमेरिकी ऑपरेशंस के लिए लोकल हायरिंग पर ज्यादा जोर देना पड़ रहा है।
नवंबर 2026 में हुए अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों ने भारतीय IT कंपनियों के लिए रेगुलेटरी माहौल को काफी जटिल बना दिया है। हालांकि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सर्विस की डिमांड अब भी बनी हुई है, लेकिन कंपनियों का पूरा फोकस अब सख्त इमिग्रेशन और लेबर पॉलिसीज को मैनेज करने पर है।
PERM प्रोग्राम का सस्पेंशन: बड़ी चुनौती
इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी चिंता अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ PERM लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम का सस्पेंशन है। यह प्रोग्राम विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा होता है। इस निलंबन का असर TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Cognizant और Capgemini जैसी बड़ी दिग्गज कंपनियों पर सीधे तौर पर पड़ रहा है। इससे न केवल एम्प्लॉई रिटेंशन को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, बल्कि अमेरिकी ऑपरेशंस के लिए भर्ती लागत (Recruitment Cost) बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है।
AI रेगुलेशन और मार्जिन पर दबाव
वीजा के अलावा, डेमोक्रेटिक नियंत्रित कांग्रेस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर कड़े नियंत्रण की तैयारी कर रही है। डेटा प्राइवेसी, सिक्योरिटी और AI एथिक्स को लेकर सख्त नियम बन सकते हैं। इन नियमों का पालन करने के लिए IT कंपनियों को लीगल और कंप्लायंस टीमों पर खर्च बढ़ाना पड़ेगा, जिसका सीधा असर उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर देखने को मिल सकता है।
बदलती रणनीति: H-1B पर कम होती निर्भरता
इन चुनौतियों के बीच भारतीय IT कंपनियां पहले से ही H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता घटा रही हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस अमेरिकी फाइनेंशियल ईयर में वीजा के लिए फ्रेश रजिस्ट्रेशन सात साल के निचले स्तर पर आ गए हैं। इस बाधा को दूर करने के लिए कंपनियों ने अब 'डिसेंट्रलाइज्ड डिलीवरी मॉडल' अपना लिया है, जिसके तहत अमेरिका में स्थानीय लोगों की भर्ती बढ़ाई जा रही है और भारत, लैटिन अमेरिका व पूर्वी यूरोप में ऑफशोर सेंटर्स को और मजबूत किया जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी सर्विस क्वालिटी से समझौता किए बिना ऑपरेशनल कॉस्ट को कैसे कंट्रोल करती हैं। मुख्य बिजनेस रिस्क यह है कि अगर वीजा के मुद्दों के चलते टैलेंट की कमी हुई, तो प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की रफ्तार धीमी हो सकती है। साथ ही, अमेरिकी कांग्रेस की नई नीतियों के स्पष्ट होने तक क्लाइंट्स की तरफ से आईटी बजट में कटौती की आशंका भी बनी हुई है।
