भारतीय IT सेक्टर में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। बड़ी IT कंपनियों ने पिछले एक साल में **24,400** से ज्यादा नौकरियां कम की हैं। इसका मुख्य कारण AI का बढ़ता इस्तेमाल और 'अनबिल्ड बेंच' टैलेंट को मैनेज करना है, ताकि मुनाफे के मार्जिन को सुधारा जा सके।
पिछले कुछ समय से भारतीय IT दिग्गजों की हायरिंग स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव आया है। Tata Consultancy Services, Infosys, HCLTech, Wipro, Tech Mahindra और LTIMindtree जैसी बड़ी कंपनियों के वर्कफोर्स में कुल मिलाकर 24,422 पदों की कटौती हुई है। अक्टूबर 2026 तक इन कंपनियों में कुल कर्मचारियों की संख्या घटकर करीब 7,97,722 रह गई है। यह आंकड़ा बताता है कि अब कंपनियां 'ग्रोथ' के लिए सिर्फ ज्यादा लोगों को रखने के पुराने मॉडल को छोड़ रही हैं।
AI से बढ़ रही ऑपरेशनल एफिशिएंसी
इस छंटनी के पीछे सबसे बड़ी वजह Generative AI का इस्तेमाल है। कंपनियां अब रूटीन मेंटेनेंस, मैनुअल टेस्टिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट जैसे कामों को AI के जरिए ऑटोमेट कर रही हैं। इससे साधारण डेवलपर्स की जरूरत कम हो गई है। यह कदम कंपनियों को ग्लोबल रेवेन्यू में सुस्ती के बावजूद अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखने में मदद कर रहा है।
इसके अलावा, 'अनबिल्ड बेंच' यानी उन कर्मचारियों की छंटनी पर भी जोर है जिन्हें अभी कोई प्रोजेक्ट नहीं मिला है। यह कंपनियों के लिए बड़ा खर्च होता था, जिसे कम करके अब बॉटम लाइन को प्रोटेक्ट किया जा रहा है।
स्पेशलाइज्ड स्किल्स की मांग बरकरार
भले ही सामान्य भूमिकाओं में भर्ती धीमी हुई है, लेकिन Cloud Infrastructure और Cybersecurity जैसे क्षेत्रों में एक्सपर्ट्स की मांग अभी भी बनी हुई है। यानी सेक्टर अपनी क्षमता कम नहीं कर रहा, बल्कि 'वॉल्यूम-आधारित' मॉडल से 'वैल्यू-आधारित' मॉडल की ओर शिफ्ट हो रहा है।
हालांकि, स्थिति हर कंपनी के लिए एक जैसी नहीं है। TCS और HCLTech जैसी कंपनियों ने हालिया तिमाही में कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में थोड़ी हायरिंग भी की है। निवेशकों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये कदम भविष्य में मार्जिन को लंबे समय तक बढ़ा पाएंगे या नहीं।
