Indian GCCs के लिए AI राह में Data Law की बड़ी रुकावट

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian GCCs के लिए AI राह में Data Law की बड़ी रुकावट

भारत में मौजूद **2,100** से ज्यादा Global Capability Centres (GCCs) पैरेंट कंपनी के AI टूल्स लागू करने में संघर्ष कर रहे हैं। सख्त डेटा प्राइवेसी नियमों (DPDPA) के कारण इन कंपनियों पर **₹250 करोड़** तक का जुर्माना लग सकता है, जिससे इनकी ऑपरेशनल लागत बढ़ रही है।

भारत के Global Capability Centres (GCCs) अब एक कठिन रेगुलेटरी माहौल से गुजर रहे हैं। देश में 2,100 से ज्यादा GCCs काम कर रहे हैं, जो करीब 23.6 लाख लोगों को रोजगार देते हैं और FY26 तक इनका रेवेन्यू $98.4 बिलियन के पार पहुंच चुका है। ये सेंटर अब सामान्य सपोर्ट से निकलकर हाई-एंड इंजीनियरिंग की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन ग्लोबल AI एजेंट्स को अपनाने में उन्हें Digital Personal Data Protection Act (DPDPA) की कड़ी शर्तों का सामना करना पड़ रहा है।

डेटा नियमों का 'Compliance Squeeze'

ज्यादातर पैरेंट कंपनियां अपने ग्लोबल सब्सिडियरीज के लिए एक स्टैंडर्ड AI टूल बनाती हैं, जो सेंट्रलाइज्ड डेटा प्रोसेसिंग पर काम करते हैं। लेकिन DPDPA के तहत, डेटा के लोकलाइजेशन और प्रोसेसिंग का कड़ा कंट्रोल अनिवार्य है। अगर गलती से भी कोई AI एजेंट सेंसिटिव डेटा को ऑफशोर सर्वर पर भेज देता है, तो कंपनी को ₹250 करोड़ प्रति उल्लंघन तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

क्यों ठप पड़े हैं AI प्रोजेक्ट्स?

रेगुलेटरी दिक्कतों के कारण करीब 70% GCCs अभी केवल AI के पायलट स्टेज पर ही अटके हुए हैं। इन्हें फुल-स्केल प्रोडक्शन में ले जाने के लिए अब कंपनियों को डेटा फ्लो की बारीकी से मैपिंग करनी पड़ रही है। इसके लिए उन्हें न केवल अलग से AI गवर्नेंस एक्सपर्ट्स रखने पड़ रहे हैं, बल्कि सिक्योरिटी कॉन्फ़िगरेशन को भी कस्टमाइज़ करना पड़ रहा है।

कंपनियों पर डबल मार

इस नई चुनौती का असर दो तरह से दिख रहा है:

  1. बढ़ती लागत: कंपनियों को अब ग्लोबल सिक्योरिटी ऑडिट के बजाय लोकल लेवल पर अलग से जांच और कस्टमाइज्ड सुरक्षा सिस्टम पर पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
  2. देरी: AI से मिलने वाली प्रोडक्टिविटी और नई सुविधाओं के रोल-आउट में देरी हो रही है, जिससे मार्केट में बढ़त की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

अब असली परीक्षा इस बात की है कि ये सेंटर कितनी जल्दी अपनी डेटा गवर्नेंस को लोकल कानूनों के मुताबिक ढाल पाते हैं, ताकि पैरेंट कंपनी की ग्लोबल एफिशिएंसी से समझौता किए बिना AI का पूरा फायदा उठाया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.