भारतीय कंपनियां अब भविष्य की ग्रोथ के लिए Artificial Intelligence (AI) और सस्टेनेबिलिटी पर भारी पैसा खर्च कर रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, **91%** भारतीय कंपनियों ने अपने AI बजट में बढ़ोतरी की है, जो कि ग्लोबल एवरेज से ज्यादा है।
निवेश और मुनाफे का गणित\n\nफिलहाल भारतीय कॉरपोरेट्स एक भारी 'इन्वेस्टमेंट फेज' से गुजर रहे हैं। कंपनियां टेक्नोलॉजी इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा सिक्योरिटी और स्पेशलाइज्ड टैलेंट को हायर करने पर बड़ा निवेश कर रही हैं। समस्या यह है कि यह खर्च तो अभी हो रहा है, लेकिन इससे होने वाला फायदा—जैसे बेहतर प्रोडक्टिविटी या कम ऑपरेशनल कॉस्ट—सामने आने में समय लगेगा। इस कारण कंपनियों के शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिखना लाजमी है।\n\n### चुनौतियां और जोखिम\n\nसिर्फ पैसा खर्च करना ही काफी नहीं है, असल चुनौती है इसे बिजनेस में ढालना। करीब 64% कंपनियां अपने AI लक्ष्यों के करीब हैं, लेकिन पूरे एंटरप्राइज लेवल पर इसे स्केल करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।\n\n* टैलेंट क्रंच: लगभग 40% कंपनियों का मानना है कि डेटा साइंस और सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की भारी कमी है, जिससे वेज कॉस्ट (Wage cost) बढ़ रही है।\n* रेगुलेटरी अड़चन: करीब 61% फर्मों ने डेटा प्राइवेसी और बदलते सरकारी नियमों के कारण काम में देरी की बात स्वीकार की है।\n\n### निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?\n\nनिवेशकों को अब केवल इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि कंपनी कितना खर्च कर रही है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि उस कैपिटल का डिप्लॉयमेंट कितनी कुशलता से हो रहा है। आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखें कि कैसे ये टेक्नोलॉजीज उनकी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बढ़ा रही हैं और क्या वे टैलेंट सप्लाई की बाधाओं को पार कर पा रहे हैं।