Cisco Splunk की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियां AI सिस्टम को मैनेज करने में दुनिया में सबसे आगे हैं। भारत में **51%** कंपनियां AI की प्रभावी निगरानी कर रही हैं, जबकि ग्लोबल औसत केवल **35%** है। हालांकि, **43%** फर्मों के लिए AI के बढ़ते खर्चों पर काबू पाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
AI के दौर में भारतीय कंपनियां तेजी से अपनी धाक जमा रही हैं। 'Cisco Splunk State of Observability 2026' रिपोर्ट बताती है कि भारतीय संस्थान अब केवल AI का प्रयोग नहीं कर रहे, बल्कि उसे व्यवस्थित करने के लिए मजबूत गवर्नेंस ढांचा भी खड़ा कर चुके हैं। 73% भारतीय फर्म्स अब ऑपरेशनल टेलीमेट्री का उपयोग अपनी कॉर्पोरेट रणनीति तय करने के लिए कर रही हैं, जो ग्लोबल स्तर पर सिर्फ 54% है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?
IT सर्विस सेक्टर के लिए यह एक बड़ा कॉम्पिटिटिव एडवांटेज है। बड़ी IT कंपनियां अब केवल AI टूल्स ही नहीं बना रहीं, बल्कि उनकी विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने का जिम्मा भी ले रही हैं। यह क्षमता उन्हें ग्लोबल कॉन्ट्रैक्ट्स जीतने में मदद कर रही है।
चुनौती: AI का खर्च और मार्जिन
तकनीकी मजबूती के बावजूद, 43% भारतीय कंपनियों का मानना है कि AI से जुड़े खर्चों को कंट्रोल करना अभी भी टेढ़ी खीर है। जैसे-जैसे कंपनियां 'एजेंटिक AI' (स्वतंत्र रूप से फैसले लेने वाले सिस्टम) की ओर बढ़ रही हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटिंग कॉस्ट का अनुमान लगाना मुश्किल होता जा रहा है। इसका सीधा असर बिजनेस मार्जिन पर पड़ सकता है।
सिक्योरिटी पर जोर
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ सिक्योरिटी और रिलायबिलिटी का मुद्दा सबसे ऊपर है। 87% भारतीय फर्म्स अब AI में होने वाली एरर्स या बायस को कम करने को प्राथमिकता दे रही हैं। 70% टीमें अपनी वर्तमान मॉनिटरिंग क्षमता को लेकर आश्वस्त हैं, जो लंबे समय में रेगुलेटरी जोखिम को कम करने के लिए जरूरी है। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि IT कंपनियां किस तरह से अपनी बढ़ती तकनीकी क्षमता को मजबूत फाइनेंशियल नतीजों में तब्दील करती हैं।
