भारत की **69%** कंपनियां अगले साल AI में निवेश बढ़ाने की तैयारी में हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि **97%** के पास इसे लागू करने के लिए जरूरी डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है। निवेशकों को कंपनियों के सिर्फ AI दावों पर नहीं, बल्कि उनकी डेटा तैयारी और गवर्नेंस पर गौर करना चाहिए।
कॉरपोरेट इंडिया इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट और काम करने के तरीके के बीच एक बड़ा गैप नजर आ रहा है। 'Dun & Bradstreet AI Momentum Survey' की रिपोर्ट बताती है कि देश की 97% कंपनियां अभी उस डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से कोसों दूर हैं, जो AI के फुल-स्केल एडॉप्शन के लिए अनिवार्य है। यह स्थिति ग्लोबल बेंचमार्क के मुकाबले भारतीय फर्मों को 5% पीछे खड़ा करती है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों के लिए मुख्य चिंता यह है कि क्या कंपनियों का पैसा सही जगह लग रहा है। डेटा के मुताबिक, जिन कंपनियों के पास मजबूत डेटा सिस्टम है, उनके AI इन्वेस्टमेंट से मुनाफा कमाने की संभावना 6.3 गुना ज्यादा है। फिलहाल, सिर्फ 30% घरेलू कंपनियां ही AI से बेहतर रिटर्न हासिल कर पा रही हैं, जबकि आधी कंपनियां मानती हैं कि उनका सिस्टम अभी केवल 'आंशिक रूप से तैयार' है।
सफलता की राह में बाधाएं
AI को सिर्फ एक एक्सपेरिमेंट से निकालकर मुनाफे में बदलने वाली बिजनेस प्रक्रिया बनाना चुनौतीपूर्ण है। अब तक सिर्फ 35% कंपनियां ही अपने प्रोजेक्ट्स को प्रोडक्शन लेवल तक ले जा पाई हैं। इसके अलावा, केवल 29% फर्मों को अपने AI रिस्क मैनेजमेंट और गवर्नेंस फ्रेमवर्क पर भरोसा है।
जो कंपनियां बिखरे हुए सिस्टम के साथ AI में पैसा झोंक रही हैं, उनके लिए आने वाले समय में ऑपरेशनल फेलियर और लागत बढ़ने का रिस्क ज्यादा है। निवेशकों को सलाह है कि वे केवल AI अपनाने के शोर पर ध्यान न दें, बल्कि कंपनी की एनुअल रिपोर्ट में 'डेटा हाइजीन', गवर्नेंस और वर्कफोर्स स्किल्स को परखें। जो कंपनियां डेटा को प्राथमिकता दे रही हैं, वही लंबी अवधि में वैल्यू क्रिएट कर पाएंगी।
