Indian Firms Face Talent Gap Despite High AI Readiness: JLL

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Firms Face Talent Gap Despite High AI Readiness: JLL

भारतीय कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर काफी तैयार हैं, लेकिन इसे अपनाने में पिछड़ रही हैं। JLL की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ **77%** भारतीय बिजनेस लीडर्स मानते हैं कि AI कार्यस्थल को बदल देगा, वहीं केवल **19%** ने ही इसे लागू करना शुरू किया है। सबसे बड़ी चुनौती फंड की कमी नहीं, बल्कि AI और टेक्नोलॉजी में कुशल कर्मचारियों की कमी है।

Detailed Coverage

AI अपनाने में भारत की स्थिति

JLL की '2026 Future of Work Survey' के अनुसार, भारतीय कंपनियां AI की क्षमता को पहचान तो रही हैं, लेकिन उसे अपने दैनिक कामकाज में एकीकृत करने में संघर्ष कर रही हैं। लगभग 80% एग्जीक्यूटिव्स को लगता है कि AI काम करने के तरीकों को बदल देगा, लेकिन 5 में से 1 से भी कम कंपनी ने इसे लागू करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।

टैलेंट की कमी, पैसे की नहीं

पुरानी धारणाओं के विपरीत, अब कंपनियों के लिए सबसे बड़ी समस्या पैसों की नहीं, बल्कि टैलेंट की है। 46% बिजनेस लीडर्स का मानना है कि AI, टेक्नोलॉजी और डेटा से जुड़े स्किल्स वाले कर्मचारियों की कमी सबसे बड़ी बाधा है। सिर्फ 35% लोगों ने बजट की कमी को मुख्य कारण बताया है। इसका मतलब है कि भविष्य में कंपनी की ग्रोथ के लिए कर्मचारियों को नई स्किल सिखाना, सिर्फ हार्डवेयर में पैसा लगाने से ज्यादा अहम होगा।

भविष्य में कितनी नौकरियां?

AI से नौकरियां जाने की आम चिंता के बावजूद, सीनियर एग्जीक्यूटिव्स अपने वर्कफोर्स को लेकर आशावादी हैं। लगभग 60% लीडर्स अगले 3 से 5 सालों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। ज्यादातर कंपनियां AI को कर्मचारियों की क्षमताओं को बढ़ाने वाले टूल के रूप में देखती हैं, न कि नौकरी बदलने वाले के रूप में। इसके बावजूद, 62% कंपनियां अभी भी हफ्ते में 4 से 5 दिन ऑफिस आने को अनिवार्य मानती हैं।

निवेश और जोखिम

कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी निवेश कर रही हैं। करीब आधी कंपनियां AI-आधारित वर्कप्लेस टूल्स और डिजिटल सिस्टम में पैसा लगा रही हैं ताकि प्रोडक्टिविटी बढ़ाई जा सके। इस निवेश के साथ ही ऑपरेशनल रिस्क भी बढ़ रहा है। साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी अब लगभग आधी कंपनियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं। AI इंटीग्रेशन से होने वाली ऑपरेशनल दिक्कतें और ऑफिस स्पेस की बदलती जरूरतें भी चिंता का सबब हैं। टेक्नोलॉजी और IT सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि कंपनियां स्किल गैप को कितनी जल्दी भर पाती हैं, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट का फायदा असल मुनाफे में बदल सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.