एक सर्वे के मुताबिक, भारत की सभी कंपनियां AI पर काम कर रही हैं और **73%** को इससे फायदा भी हो रहा है। लेकिन, सिर्फ **4%** कंपनियां ही मानती हैं कि उनका डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर AI को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बताता है कि AI पर खर्च और असल प्रॉफिट में अभी भी दूरी है।
AI पर बढ़ा भारतीय कंपनियों का फोकस
नई Dun & Bradstreet AI Momentum Survey के अनुसार, भारतीय कंपनियां अब AI को सिर्फ प्रयोग के तौर पर नहीं, बल्कि अपने रोजमर्रा के कामों में भी शामिल कर रही हैं। सर्वे में शामिल हर कंपनी AI पर सक्रिय रूप से काम कर रही है, लेकिन उनकी तैयारी का स्तर अलग-अलग है। करीब 44% कंपनियां अभी टेस्टिंग या प्लानिंग फेज में हैं, जबकि 30% ने AI का इस्तेमाल अपने रोज़मर्रा के ऑपरेशन्स में शुरू कर दिया है। वहीं, लगभग 26% कंपनियां AI को अपने मुख्य बिजनेस फंक्शन्स में इंटीग्रेट कर चुकी हैं या Agentic AI (जो इंसानी दखल के बिना जटिल काम कर सके) का इस्तेमाल कर रही हैं।
AI में निवेश और प्रॉफिट की कहानी
कंपनियां इस टेक्नोलॉजी पर जमकर पैसा लगा रही हैं। सर्वे में शामिल दो-तिहाई से ज्यादा कंपनियां AI पर अपने खर्च को बढ़ाने वाली हैं। इनमें से 13% कंपनियां खर्च में बड़ी बढ़ोतरी करने की सोच रही हैं, जबकि 56% मामूली बढ़ोतरी करेंगी। यह दिखाता है कि कंपनियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए AI को लेकर गंभीर हैं। हालांकि, यह देखना अहम होगा कि यह बढ़ा हुआ कैपिटल स्पेंडिंग भविष्य में सस्टेनेबल कॉस्ट सेविंग या रेवेन्यू ग्रोथ में तब्दील होता है या नहीं।
डेटा की क्वालिटी बनी सबसे बड़ी रुकावट
AI पहलों से 73% कंपनियों को फायदा हो रहा है, लेकिन यह फायदा अभी छोटे प्रोजेक्ट्स या कुछ खास विभागों तक ही सीमित है। इसे पूरे बिजनेस में फैलाना मुश्किल हो रहा है, जिसका मुख्य कारण है डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी। सिर्फ 4% कंपनियों ने कहा कि उनका डेटा बड़े पैमाने पर AI लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं, 58% का मानना है कि उनका डेटा आंशिक रूप से तैयार है, और 30% इसे ज्यादातर तैयार मानते हैं।
यह कंपनियों के लिए एक एग्जीक्यूशन रिस्क पैदा करता है। अगर डेटा की क्वालिटी खराब या असंगत है, तो AI सिस्टम उतना असरदार नहीं होगा, जितना उम्मीद की जा रही है। इससे इन्वेस्टमेंट पर रिटर्न भी कम मिल सकता है। इसलिए, जो निवेशक AI पर ज्यादा खर्च करने वाली कंपनियों पर नजर रख रहे हैं, उन्हें मैनेजमेंट से डेटा को बेहतर बनाने के प्रयासों के बारे में सुनना चाहिए। जो कंपनियां अपने डेटा को साफ और व्यवस्थित करने में सफल होंगी, उन्हें टेक्नोलॉजी पर किए गए खर्च का बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना है। पायलट प्रोजेक्ट्स से कंपनी-व्यापी स्तर तक पहुंचने की क्षमता ही तय करेगी कि आने वाले सालों में कौन सी कंपनियां बाजी मारेंगी।
