Fintech Sector Update: AI के चक्कर में बढ़ा खर्च, क्या Paytm और Groww जैसे शेयरों पर पड़ेगा दबाव?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Fintech Sector Update: AI के चक्कर में बढ़ा खर्च, क्या Paytm और Groww जैसे शेयरों पर पड़ेगा दबाव?

Paytm, Groww और PB Fintech जैसी दिग्गज कंपनियों के टेक्नोलॉजी और डेटा सेंटर खर्च में भारी उछाल आया है। AI ऑपरेशंस को बढ़ाने की होड़ में कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं, जिससे मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत की दिग्गज फिनटेक कंपनियां इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, लेकिन इस तकनीकी बदलाव की भारी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। One97 Communications (Paytm), Groww और PB Fintech जैसी कंपनियों ने अपने हालिया नतीजों में टेक्नोलॉजी, क्लाउड और डेटा सेंटर पर होने वाले खर्चों में जबरदस्त इजाफा दिखाया है। यह संकेत है कि कंपनियां अब छोटे प्रयोगों से आगे बढ़कर बड़े स्तर पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रही हैं।

आंकड़ों में समझें दबाव

लेटेस्ट फाइनेंशियल फाइलिंग्स के मुताबिक, Paytm का सॉफ्टवेयर, क्लाउड और डेटा सेंटर खर्च 59% बढ़कर सितंबर तिमाही में ₹211 करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, Groww की बात करें तो उसकी सर्विस कॉस्ट 66% साल-दर-साल उछलकर ₹206 करोड़ हो गई है, जिसमें से केवल AI डेवलपमेंट के लिए ₹13 करोड़ खर्च किए गए। इसके अलावा, PB Fintech का इंटरनेट से जुड़ा खर्च भी 65% बढ़कर ₹71 करोड़ के स्तर पर आ गया है।

क्यों बढ़ रहा है खर्च?

इस बढ़ती लागत की बड़ी वजह ग्लोबल मार्केट में कंप्यूट पावर और स्टोरेज की डिमांड-सप्लाई में असंतुलन है। GPU और क्लाउड सर्विसेज के दाम आसमान छू रहे हैं। वर्तमान में कई कंपनियां पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स का फायदा उठा रही हैं, लेकिन जैसे ही Amazon Web Services और Google Cloud के साथ ये एग्रीमेंट रिन्यू होंगे, कंपनियों पर खर्च का और भी बड़ा बोझ पड़ सकता है।

इसके अलावा, रेगुलेटरी अनुपालन (Compliance) का दबाव भी है। क्रेडिट अंडरराइटिंग और फ्रॉड डिटेक्शन में 'Explainable AI' जैसे कड़े नियमों का पालन करना अब अनिवार्य हो गया है, जिसे नजरअंदाज करना कंपनियों के लिए मुमकिन नहीं है।

निवेशकों के लिए क्या है मुख्य मॉनिटरेबल?

भारत का डेटा सेंटर सेक्टर 2030 तक 6.7 GW से ज्यादा की क्षमता की ओर बढ़ रहा है। लेकिन निवेशकों के लिए असली चिंता मार्जिन की सुरक्षा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कंपनियों का यह भारी-भरकम निवेश आने वाले समय में उनकी एफिशिएंसी बढ़ाएगा और रेवेन्यू में इजाफा करेगा, या फिर यह लंबे समय तक मुनाफे पर एक बड़ा 'ड्रैग' (Drag) बना रहेगा। निवेशकों को अगली तिमाही के नतीजों में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर कड़ी नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.