भारत के सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स, जैसे Agrani Labs और Ananant Systems, AI और 5G हार्डवेयर विकसित करने के लिए बड़े पैमाने पर फंड जुटा रहे हैं। निवेशकों को यह समझना होगा कि ये कंपनियां अभी प्राइवेट हैं और इस सेक्टर में जोखिम काफी अधिक होता है।
भारत का चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम अब रफ्तार पकड़ रहा है। बेंगलुरु स्थित Agrani Labs अपनी AI इंफरेंस चिप के विकास के लिए $50 मिलियन की फंडिंग राउंड बंद करने के करीब है। वहीं, Ananant Systems वायरलेस सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के लिए सरकारी सपोर्ट का लाभ उठा रही है।
रिटेल निवेशकों के लिए सतर्क रहने की जरूरत
निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि Agrani Labs और Ananant Systems जैसी कंपनियां अभी अनलिस्टेड (Unlisted) हैं, यानी इनके शेयर आप NSE या BSE पर नहीं खरीद सकते। हालांकि यह फंडिंग भारतीय इंजीनियरिंग टैलेंट की ताकत दिखाती है, लेकिन पब्लिक के लिए इनमें निवेश का सीधा जरिया अभी उपलब्ध नहीं है। जो निवेशक इस सेक्टर में दांव लगाना चाहते हैं, उन्हें उन लिस्टेड कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो चिप वैल्यू चेन में सॉफ्टवेयर, पैकेजिंग या टेस्टिंग सेवाएं प्रदान करती हैं।
ग्लोबल कंपनियों की नजर
सेमीकंडक्टर सेक्टर में हलचल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जर्मन दिग्गज Infineon Technologies ने हाल ही में C2i Semiconductors का अधिग्रहण किया है। इससे स्पष्ट होता है कि विदेशी कंपनियां भारतीय स्टार्टअप्स को भविष्य के कॉम्पिटिटर के बजाय अपनी टेक्नोलॉजी और टैलेंट हासिल करने के जरिया के रूप में देख रही हैं।
जोखिम और चुनौतियां
सेमीकंडक्टर R&D का बिजनेस काफी 'कैपिटल-इंटेंसिव' है। इन कंपनियों का कैश बर्न बहुत अधिक होता है और प्रॉफिट में आने में सालों लग सकते हैं। इसके अलावा, Anusandhan National Research Foundation द्वारा संचालित RDI Fund की चयन प्रक्रिया पर हालिया विवादों ने पारदर्शिता के मुद्दों को भी उजागर किया है। ऐसे में सरकारी मदद पर निर्भर कंपनियों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण 'Semicon 2.0' जैसे सरकारी योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन (Execution) देखना होगा। असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये स्टार्टअप्स कब तक डिजाइन से कमर्शियल प्रोडक्शन की ओर बढ़ पाते हैं।
