भारत का बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) सेक्टर अब पुराने ढर्रे से निकलकर स्किल-बेस्ड करियर मॉडल की ओर बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल और स्पेशलाइज्ड एडवाइजरी कामों पर जोर देने से यह बदलाव आ रहा है, ताकि प्रोफेशनल एक मीनिंगफुल ग्रोथ पा सकें।
Detailed Coverage
AI का वर्कर्स पर असर
जनरेटिव AI के आने से BPM सेक्टर में नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है। पहले जहां रूटीन और दोहराए जाने वाले काम होते थे, अब वहां क्रिटिकल थिंकिंग और गहरी बिजनेस समझ की जरूरत पड़ रही है। वर्कर्स को 'AI मल्टीप्लायर' की तरह काम करना होगा, जो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके एफिशिएंसी बढ़ाएं और साथ ही प्रॉब्लम-सॉल्विंग, एनालिसिस और कॉम्प्लेक्स कम्युनिकेशन जैसे इंसानी हुनर पर फोकस करें।
करियर में नई उड़ान और छोटे शहरों में विस्तार
अब प्रोफेशनल्स अलग-अलग डोमेन, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल लोकेशंस में आसानी से मूव कर सकते हैं। कंपनियां आगे रहने के लिए डिग्री से ज्यादा लगातार स्किल सीखने पर जोर दे रही हैं। साथ ही, BPM कंपनियां अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। इससे उन्हें नए टैलेंट पूल तक पहुंचने और बड़े शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, जिससे कॉस्ट भी कम हो सकती है और टैलेंट रिटेंशन भी सुधर सकता है।
सोशल इंपैक्ट का भी ध्यान
फाइनेंशियल और प्रोफेशनल लक्ष्यों के अलावा, BPM कंपनियां अब अपने बिजनेस में 'पर्पस' (उद्देश्य) को भी शामिल कर रही हैं। क्लाइमेट डेटा, पब्लिक हेल्थ और फाइनेंशियल इंक्लूजन जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम करके, वे ऐसे टैलेंट को आकर्षित कर रही हैं जो पैसे के साथ-साथ सोशल इंपैक्ट भी चाहती हैं। इन्वेस्टर्स के लिए, हाई-वैल्यू सर्विसेज की ओर यह कदम लंबे समय में प्रॉफिट मार्जिन बढ़ा सकता है, लेकिन कंपनियों को स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स को सफलतापूर्वक लागू करना होगा और नए बिजनेस मॉडल्स को अपनाना होगा। यह देखना अहम होगा कि कंपनियां कितनी तेजी से अपने रेवेन्यू मिक्स को पारंपरिक ट्रांजैक्शनल सर्विसेज से इन नई, स्पेशलाइज्ड एडवाइजरी ऑफर्स में बदल पाती हैं।
