15 अक्टूबर को भारतीय टेक्नोलॉजी और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों में **6%** तक की भारी गिरावट देखी गई। इस गिरावट के पीछे अमेरिका में बढ़ती महंगाई के आंकड़े और ब्याज दरों के बढ़ने का डर मुख्य कारण है, जिससे AI और डेटा सेंटर से जुड़ी कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट की सुस्ती का असर
15 अक्टूबर को भारतीय बाजारों में उन शेयरों में बिकवाली देखी गई, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हैं। ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों के चलते टेक्नोलॉजी और पावर इक्विपमेंट शेयरों में 3% से 6% तक की गिरावट दर्ज की गई।
क्यों मचा है बाजार में डर?
गिरावट की शुरुआत सितंबर के अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस डेटा के साथ हुई, जो पिछले 5 महीनों में सबसे तेज दर से बढ़ी है। इसके चलते फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका बढ़ गई है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो हाई-ग्रोथ टेक कंपनियों का वैल्यूएशन कम हो जाता है। इसका असर वैश्विक स्तर पर Nvidia और AMD जैसे चिपमेकर्स पर दिखा, जिसकी आंच भारत में Netweb Technologies, E2E Networks, और ESDS Software तक पहुंची।
पावर कंपनियों पर भी दबाव
सिर्फ टेक ही नहीं, बल्कि AI डेटा सेंटर्स को बिजली देने वाली पावर इंफ्रा कंपनियां भी चपेट में आ गई हैं। Hitachi Energy India, GE Vernova T&D India, और CG Power and Industrial Solutions जैसे स्टॉक्स, जो अब तक AI बूम का फायदा उठा रहे थे, आज भारी नुकसान में दिखे।
आगे की राह क्या है?
बाजार अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या AI पर होने वाला भारी निवेश शॉर्ट टर्म में मुनाफा दे पाएगा। पावर इक्विपमेंट कंपनियां कॉर्पोरेट निवेश पर टिकी होती हैं। यदि ब्याज दरों के कारण कंपनियों का विस्तार धीमा होता है, तो पावर ग्रिड और डेटा सेंटर की डिमांड प्रभावित हो सकती है। निवेशकों के लिए अब इन कंपनियों के ऑर्डर बुक और मार्जिन को मैनेज करने की क्षमता ही सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर होगी।
