साल 2026 में इंडियन AI स्टार्टअप्स में प्राइवेट निवेशकों का भरोसा जमकर बरसा है। इन कंपनियों ने अब तक **$5 बिलियन** की फंडिंग जुटा ली है, लेकिन रिटेल निवेशकों के लिए अभी सीधा निवेश का विकल्प सीमित है।
भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में पैसों की बारिश हो रही है। साल 2026 के शुरुआती 9 महीनों में ही इन स्टार्टअप्स ने $5 बिलियन का भारी-भरकम निवेश हासिल कर लिया है। यह पूरे प्राइवेट इक्विटी कैपिटल का लगभग 20% हिस्सा है। हालांकि, NSE और BSE पर नजर रखने वाले आम निवेशकों के लिए फिलहाल इस ग्रोथ का हिस्सा बनने के मौके कम हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सबसे ज्यादा फोकस
दिलचस्प बात यह है कि यह पैसा सिर्फ सॉफ्टवेयर बनाने में नहीं, बल्कि AI की नींव तैयार करने में खर्च हो रहा है। Goldman Sachs के डेटा के अनुसार, डेटा सेंटर्स और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स—जो AI की रीढ़ हैं—में $35 बिलियन तक की वैल्यू छिपी है। इसके अलावा, एंटरप्राइज सर्विसेज और हेल्थकेयर सेक्टर का वैल्युएशन करीब $18 बिलियन आंका गया है।
पब्लिक मार्केट में देरी क्यों?
ज्यादातर स्टार्टअप्स अभी अपने शुरुआती चरण में हैं और मुनाफे के बजाय 'कैश बर्निंग' (तेजी से खर्च) पर ध्यान दे रहे हैं। पब्लिक मार्केट उन कंपनियों को पसंद करता है जिनके पास स्थिर कैश फ्लो और मजबूत मार्जिन हो, जो इन कंपनियों में अभी नदारद है।
रिस्क और आगे क्या होगा?
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि डेटा सेंटर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भारी पूंजी और जमीन की जरूरत होती है। यदि भविष्य में AI सेवाओं की मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी, तो कंपनियों के रिटर्न पर दबाव आ सकता है। जानकारों का मानना है कि अगले 24 महीनों में इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियां पहले IPO ला सकती हैं, उसके बाद ही AI सॉफ्टवेयर फर्मों की बारी आएगी। निवेशकों के लिए फिलहाल इन कंपनियों का 'ग्रोथ मॉडल' से 'प्रॉफिटेबिलिटी मॉडल' की ओर शिफ्ट होना सबसे अहम ट्रैक करने वाला फैक्टर होगा।
