Indian AI Companies: Big Tech पर निर्भरता कम, Multi-Cloud का बोलबाला

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Indian AI Companies: Big Tech पर निर्भरता कम, Multi-Cloud का बोलबाला
Overview

भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियां एक बड़ी रणनीति अपना रही हैं। वे किसी एक बड़े क्लाउड प्रोवाइडर पर निर्भर रहने के बजाय, हाइब्रिड या मल्टी-क्लाउड तरीकों को अपना रही हैं। लगभग **90%** कंपनियां अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को अलग-अलग क्लाउड पर फैला रही हैं। इसका मकसद Big Tech कंपनियों के एकाधिकार से बचना और अपनी फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाना है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

भारत में AI का अनोखा रास्ता

दुनियाभर के रुझानों से अलग, भारत की AI इंडस्ट्री क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और ओपन-सोर्स टूल्स को लेकर ज्यादा विविधता अपना रही है। Esya Centre की एक रिपोर्ट बताती है कि करीब 90% भारतीय AI कंपनियां हाइब्रिड या मल्टी-क्लाउड स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर रही हैं या करने की योजना बना रही हैं। इस रिपोर्ट में AI से जुड़ी 227 कंपनियों को शामिल किया गया था।

क्लाउड का बढ़ता इस्तेमाल

सर्वे में शामिल 62% कंपनियां अपने डेटा सेंटरों के साथ-साथ कई छोटे क्लाउड प्रोवाइडर्स की सेवाओं का भी इस्तेमाल कर रही हैं। 80% से ज्यादा फर्मों के किसी एक क्लाउड वेंडर के साथ एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट नहीं हैं, जो उनके इंफ्रास्ट्रक्चर की फ्लेक्सिबिलिटी को दिखाता है। इस कॉम्पिटिशन की वजह से लागत कम हो रही है, क्योंकि लगभग 99% कंपनियों ने कंप्यूट एक्सपेंस में कमी दर्ज की है। मल्टी-क्लाउड अपनाने के पीछे कई वेंडर्स का इस्तेमाल और लागत का मैनेजमेंट बड़े कारण हैं।

परफॉर्मेंस और सिक्योरिटी पहली पसंद

आम तौर पर उम्मीद की जाती है कि कीमत सबसे अहम होगी, लेकिन रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि क्लाउड प्रोवाइडर चुनते समय परफॉर्मेंस और सिक्योरिटी कीमत से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। तीन-चौथाई कंपनियों के लिए, ये फैक्टर लागत से ऊपर "अत्यंत महत्वपूर्ण" थे। AI वर्कलोड बढ़ने के साथ स्केलिंग (Scaling) की क्षमता और सेवाओं की रेंज भी अहमियत रखती है, जो रिलायबिलिटी और फ्लेक्सिबल डिप्लॉयमेंट पर फोकस दिखाती है।

ओपन-सोर्स मॉडल की बढ़ती मांग

भारतीय AI सेक्टर ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी का तेजी से इस्तेमाल कर रहा है। लगभग 83% कंपनियां ओपन-सोर्स फाउंडेशन मॉडल, 67% प्रोप्राइटरी मॉडल और 63% कस्टम-ट्रेन्ड सिस्टम का उपयोग करती हैं। जरूरत के हिसाब से मॉडल डिप्लॉय करने में भी कंपनियां फ्लेक्सिबल हैं। पांच में से तीन कंपनियां एक ही कैटेगरी में कई मॉडल इस्तेमाल करती हैं, और 81% अपनी जरूरत के हिसाब से स्मॉल और लार्ज लैंग्वेज मॉडल को कम्बाइन करती हैं।

भारत के जेनरेटिव AI स्टार्टअप सीन में भी भारी ग्रोथ देखी गई है, जो 2023 की पहली छमाही से 2024 की पहली छमाही के बीच 3.6 गुना बढ़ा है। हालांकि, कंपनियों को खराब डेटा क्वालिटी, सरकारी डेटा तक सीमित पहुंच, कॉपीराइट के अस्पष्ट नियम और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDPA), 2023 से जुड़े रेगुलेटरी अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

"सर्वे का डेटा एक AI इकोसिस्टम दिखाता है जो कई लोगों की सोच से कहीं ज्यादा एक्टिव और कॉम्पिटिटिव है," Meghna Bal, डायरेक्टर, Esya Centre ने कहा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में AI को व्यापक रूप से अपनाने में सबसे बड़ी रुकावट मार्केट कंसंट्रेशन या फंडिंग नहीं, बल्कि स्किल्ड AI टैलेंट की भारी कमी है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.