केंद्रीय आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने घोषणा की है कि अगले एक महीने के भीतर AI रेगुलेशन पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा। इसका मुख्य मकसद डीपफेक (Deepfakes) पर लगाम लगाना और साइबर सुरक्षा को मजबूत करना है।
'टेक्नो-लीगल' अप्रोच का क्या मतलब है?
सरकार का नया प्रस्तावित फ्रेमवर्क 'टेक्नो-लीगल' (Techno-legal) मॉडल पर आधारित है। इसका अर्थ है कि अब केवल कानूनों पर निर्भर रहने के बजाय, तकनीक का उपयोग करने वाली कंपनियों को खुद सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी होगी। इस कदम का उद्देश्य भारत में AI के विकास को सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। यह 'IndiaAI Mission' का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार इनोवेशन और सुरक्षा के बीच एक संतुलन बनाना चाहती है।
कंपनियों और निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
इस नियम के आने से टेक कंपनियों पर कंप्लायंस (Compliance) का बोझ बढ़ सकता है। अगर सरकार कड़े सुरक्षा मानक या रिपोर्टिंग टाइमलाइन लागू करती है, तो कंपनियों के ऑपरेशनल खर्च में इजाफा हो सकता है। खास तौर पर वे कंपनियां जो जेनेरेटिव AI पर काम कर रही हैं, उन्हें अब कड़े 'सेफ्टी गार्डरेल्स' अपनाने होंगे।
दिलचस्प बात यह है कि केवल आईटी मंत्रालय ही नहीं, बल्कि SEBI भी सिक्योरिटी मार्केट के लिए AI गाइडलाइन्स पर काम कर रहा है, ताकि मार्केट की निगरानी बेहतर हो सके। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि प्रमुख टेक कंपनियां अपनी विकास रणनीति को कैसे बदलती हैं और सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना खर्च बढ़ाती हैं।
