भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 'Semicon 2.0' पॉलिसी का ऐलान किया है, जिसका कुल बजट **₹1.27 लाख करोड़** है। इस पहल के तहत C-DAC **$200 मिलियन** के प्रोजेक्ट से अपना खुद का AI चिप बनाने पर काम कर रहा है।
भारत सरकार ने 31 अगस्त, 2026 को 'Semicon 2.0' स्कीम का औपचारिक ऐलान किया है। इस बड़ी योजना का लक्ष्य देश में डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च का एक पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है। इस विजन का एक अहम हिस्सा C-DAC का पांच साल का प्रोजेक्ट है, जिसमें $200 मिलियन (करीब ₹1,900 करोड़) की लागत से स्वदेशी AI चिप विकसित की जाएगी।
क्यों जरूरी है स्वदेशी चिप?
यह कदम ग्लोबल सप्लाई चेन की निर्भरता कम करने के लिए एक रणनीतिक जवाब है। भारत का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि डिफेंस, एयरोस्पेस और पब्लिक सर्विसेज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का डेटा विदेशी तकनीक पर निर्भर न रहे। इस प्रोजेक्ट में 2nm (नैनोमीटर) चिप बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो काफी तेज और किफायती परफॉर्मेंस देती है।
प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी
सरकार के साथ-साथ निजी कंपनियां भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। HCL Technologies ने हाल ही में Sarvam AI में $150 मिलियन का निवेश किया है और ओडिशा में एक बड़ा AI डेटा सेंटर बनाने की योजना है।
चुनौतियां और हकीकत
इतना बड़ा लक्ष्य होने के बावजूद भारत के सामने सबसे बड़ी बाधा मैन्युफैक्चरिंग की है। फिलहाल देश में 2nm चिप बनाने के लिए जरूरी हाई-एंड फैब्रिकेशन फैसिलिटीज नहीं हैं, जिसके कारण उत्पादन के लिए Taiwan Semiconductor Manufacturing Co. (TSMC) जैसे ग्लोबल फाउंड्रीज पर निर्भर रहना पड़ेगा। इसके अलावा, ग्लोबल दिग्गजों की तुलना में कम लागत पर चिप बनाना और बड़े पैमाने पर उत्पादन करना सरकार और कंपनियों के लिए एक बड़ी वित्तीय चुनौती होगी। इसका असली टेस्ट साल 2030 तक चिप के सफल डिप्लॉयमेंट से होगा।
