Ministry of Electronics and Information Technology ने डेटा शेयरिंग के लिए नया DEPA फ्रेमवर्क लॉन्च किया है। यह सिस्टम सेंसिटिव डेटा को सुरक्षित रखते हुए AI मॉडल्स को ट्रेन करने की अनुमति देता है, जो भारतीय टेक सेक्टर के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 'डेटा एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर' यानी DEPA फ्रेमवर्क पेश किया है। अब तक AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए भारी मात्रा में डेटा ट्रांसफर करना पड़ता था, जिसमें डेटा चोरी और प्राइवेसी का खतरा बना रहता था।
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?
इस नए फ्रेमवर्क का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब डेटा को मूव करने के बजाय, AI मॉडल्स को डेटा के पास ले जाया जाएगा। यानी, एल्गोरिदम एक सुरक्षित माहौल में काम करेंगे और मूल डेटा कभी भी कंपनी के सिस्टम से बाहर नहीं जाएगा। इससे डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर लगाम लगेगी।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
विशेषज्ञों का मानना है कि DEPA का इम्पैक्ट वैसे ही हो सकता है जैसे UPI ने डिजिटल ट्रांजेक्शन के क्षेत्र में किया था। यह फ्रेमवर्क फाइनेंस, हेल्थकेयर और रिटेल सेक्टर की कंपनियों को उस डेटा तक पहुंच प्रदान करेगा जो अब तक सुरक्षा कारणों से बंद था। इससे न केवल AI डेवलपमेंट की कॉस्ट कम होगी, बल्कि भारतीय स्टार्टअप्स को ग्लोबल स्तर पर एक कॉम्पिटिटिव एज भी मिलेगा।
हालांकि, निवेशकों को इस ट्रांजिशन के दौरान साइबर सिक्योरिटी के मानकों पर नजर रखनी होगी। कंपनियों के लिए चुनौती यह होगी कि वे बिना किसी नए तकनीकी जोखिम के इन प्रोटोकॉल्स को कैसे अपनाती हैं। बाजार अब यह देख रहा है कि बड़ी टेक कंपनियां और इंडस्ट्री लीडर्स इसे कितनी तेजी से अपनाते हैं, जो भविष्य में सेक्टर की ग्रोथ का बड़ा पैमाना बनेगा।
