Centre for Digital Economy Policy Research (C-DEP) ने स्वदेशी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए B-SCALE फ्रेमवर्क पेश किया है। नया DOLT मॉडल डेटा पर भारतीय नियंत्रण को मजबूत करेगा और घरेलू डेटा सेंटर ऑपरेटरों के लिए बड़े बदलाव ला सकता है।
स्वदेशी क्लाउड का नया रोडमैप
भारत अब अपनी डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है। Centre for Digital Economy Policy Research (C-DEP) ने Defence Tech Day पर 'Bharat Sovereign Cloud Assurance Levels Evaluation' (B-SCALE) फ्रेमवर्क लॉन्च किया है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी क्लाउड प्रोवाइडर्स पर निर्भरता को कम करना और देश के महत्वपूर्ण डेटा पर स्वदेशी नियंत्रण सुनिश्चित करना है।
B-SCALE के 4 मुख्य स्तर
यह फ्रेमवर्क क्लाउड मैच्योरिटी (Cloud Maturity) को 4 स्तरों में बांटता है:
- Level 0: सामान्य एनवायरनमेंट, जिसमें कोई खास घरेलू सीमाएं नहीं होतीं।
- Level 1: डेटा रेजिडेंसी, डिजास्टर रिकवरी और पर्सनल एडमिनिस्ट्रेशन पर घरेलू निगरानी।
- Level 2: नेटवर्क आर्किटेक्चर, एन्क्रिप्शन की (Encryption Keys) और सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर पूर्ण नियंत्रण।
- Level 3: पूर्ण संप्रभुता (Sovereignty), जहां पूरा क्लाउड स्टैक बाहरी हस्तक्षेप के बिना स्वतंत्र रूप से काम करता है।
क्या है नया DOLT मॉडल?
पारंपरिक वित्तीय मेट्रिक्स के बजाय, C-DEP ने अब 65 मापदंडों वाला 'Data, Operational, Legal, and Technical' (DOLT) मॉडल पेश किया है। अब कंपनियां सिर्फ खर्च के आधार पर अपनी घरेलू क्षमता नहीं दिखा पाएंगी, बल्कि उन्हें तकनीकी और कानूनी नियंत्रण का प्रमाण देना होगा।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
यह नई पॉलिसी Tata Communications और Reliance Jio जैसी कंपनियों के लिए कैपिटल स्पेंडिंग (Capex) की प्राथमिकताएं बदल सकती है। डेटा सेंटर्स को इन 65 पैरामीटर्स के अनुरूप अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना पड़ सकता है, जिससे शुरुआती तौर पर ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ सकती है। हालांकि, लंबे समय में यह स्वदेशी टेक सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, बशर्ते सरकार इसे सख्ती से लागू करे।
