भारत ने अगले **25 सालों** के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक रोडमैप तैयार किया है। IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम और AI जैसे क्षेत्रों में विदेशों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार डीप-टेक मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देगी।
भारत सरकार ने अपनी टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए 25 साल का एक महत्वाकांक्षी मल्टी-फेज फ्रेमवर्क पेश किया है। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में IT और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना का मकसद ग्लोबल सप्लाई चेन में होने वाले बदलावों और भू-राजनीतिक जोखिमों (Geopolitical Risks) से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करना है।
यह रोडमैप तीन हिस्सों में बंटा है: 5 साल के शॉर्ट-टर्म लक्ष्य, 15 साल के मीडियम-टर्म गोल और 25 साल की लंबी अवधि की योजनाएं। सरकार का रुख अब केवल असेंबली से हटकर कच्चे माल, इंडस्ट्रियल गैस और केमिकल सबस्ट्रेट्स जैसे कंपोनेंट्स को स्थानीय स्तर पर तैयार करने की ओर है।
सेमीकंडक्टर और टेलीकॉम पर फोकस
इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को पूरी तरह तैयार करना है। जिस तरह भारत ने 4G और 5G टेलीकॉम स्टैक को सफलतापूर्वक 100,000 से ज्यादा टावरों पर लागू किया है, उसी मॉडल को अब AI और अन्य डीप-टेक क्षेत्रों में दोहराया जाएगा। सरकार अब असेंबली के बजाय फैब्रिकेशन के लिए जरूरी मैटेरियल को भारत में ही बनाने पर जोर दे रही है।
फिस्कल हेल्थ और चुनौतियां
सरकार का कॉन्फिडेंस देश की सुधरती फिस्कल स्थिति से आ रहा है। पिछले 5 सालों में भारत का पब्लिक डेट-टू-GDP रेशियो 61% से घटकर 55% पर आ गया है, जो लंबी अवधि के प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी वित्तीय स्थिरता प्रदान करता है।
हालांकि, राह आसान नहीं है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में भारी पूंजी (Capital) और स्किल लेबर की जरूरत होती है। निवेशकों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि सरकार कैसे पॉलिसी में निरंतरता बनाए रखती है और कैसे घरेलू कंपनियां ग्लोबल खिलाड़ियों के सामने लागत के मामले में कॉम्पिटिटिव बनी रहती हैं।
