भारत का टेलीकॉम सेक्टर अब तेजी से 5G नेटवर्क बिछाने के बजाय रेवेन्यू जेनरेट करने की रणनीति पर काम कर रहा है। 95% कवरेज के बाद अब कंपनियां टैरिफ हाइक और एंटरप्राइज सर्विस पर जोर दे रही हैं।
मुनाफे की ओर बढ़ते कदम
देश में 5G इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की होड़ अब ठंडी पड़ रही है। मिड-बैंड 5G कवरेज के 95% आबादी तक पहुँचने के बाद, अब टेलीकॉम ऑपरेटर्स का मुख्य लक्ष्य इस नेटवर्क से पैसा कमाना है। Reliance Jio और Bharti Airtel जैसी दिग्गज कंपनियां अब अपने एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) को बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं। इसके लिए फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA), सर्विस बंडलिंग और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस पर जोर दिया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में टेलीकॉम टैरिफ में 12-15% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
Ericsson की भूमिका
इक्विपमेंट सप्लायर Ericsson के मुताबिक, अब नेटवर्क की भारी-भरकम क्षमता के बजाय 'नेटवर्क इंटेलिजेंस' की मांग बढ़ गई है। पुणे में स्थित कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग हब अब एक रणनीतिक केंद्र बन चुका है, जहां से 15,000 से ज्यादा एंटीना और लाखों पुर्जे दुनिया भर में एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं, जिससे कॉस्ट कंट्रोल में मदद मिल रही है।
Vodafone Idea का रिवाइवल प्लान
जहाँ एक तरफ मार्केट लीडर्स मुनाफे पर ध्यान दे रहे हैं, वहीं Vodafone Idea अपने नेटवर्क को मजबूत करने में जुटी है। कंपनी अगले तीन सालों में ₹45,000 करोड़ का कैपेक्स (Capex) प्लान लागू कर रही है। इसके लिए कंपनी ने ₹6,400 करोड़ की शुरुआती फंडिंग जुटा ली है और ₹9,000 करोड़ के ऑर्डर भी दे दिए हैं।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
मुनाफे की राह भले ही दिख रही हो, लेकिन रिस्क अभी भी बने हुए हैं। Vodafone Idea के लिए भारी कर्ज और लिक्विडिटी का दबाव बड़ी चुनौती है। वहीं पूरे सेक्टर में कॉम्पिटिशन काफी तेज है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि एंटरप्राइज क्लाइंट्स कितनी तेजी से 5G सेवाओं को अपनाते हैं और टैरिफ हाइक का असर क्या होता है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में चिपसेट और हार्डवेयर की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव भी मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
