भारत के टेक सेक्टर में अक्टूबर 2026 में **1.2 लाख** नई जॉब ओपनिंग्स दर्ज की गई हैं, जो पिछले **18 महीनों** का उच्चतम स्तर है। आईटी सर्विसेज में रिकवरी के संकेतों के बीच, कंपनियां अब फ्रेशर्स के बजाय अनुभवी प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दे रही हैं और ऑफिस से काम करने के नियमों को कड़ा कर रही हैं।
भर्ती में तेजी और बदलती रणनीति
आईटी सर्विसेज सेक्टर में लगातार 4 महीनों से विस्तार देखने को मिल रहा है, जो कंपनी के बेहतर ऑर्डर बुक और प्रोजेक्ट पाइपलाइन की ओर इशारा करता है। हालांकि, भर्ती की यह लहर एक बड़े बदलाव का संकेत भी है। अब कंपनियां मिड-टू-सीनियर लेवल के टैलेंट पर ज्यादा जोर दे रही हैं, जो कुल ओपनिंग्स का 55% हिस्सा है। फ्रेशर्स के लिए मौके अभी भी सीमित हैं, जो छात्रों के कौशल और आधुनिक प्रोजेक्ट्स, खासकर AI और ऑटोमेशन की जरूरतों के बीच के अंतर को दर्शाता है।
ऑफिस वापसी का असर और बढ़ता खर्च
वर्क कल्चर में बड़ा बदलाव आया है। नए जॉब पोस्टिंग्स में से 81% अब पूर्णकालिक ऑफिस उपस्थिति (full-time office attendance) की मांग कर रहे हैं। निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है—ऑफिस में वापसी से सहयोग तो बेहतर हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली और फैसिलिटी मैनेजमेंट का खर्च भी बढ़ेगा। क्या यह बढ़ा हुआ खर्च कंपनी के नेट प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डालेगा? यह देखना होगा।
क्या है भविष्य की तैयारी?
कंपनियां अब कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय 'आउटकम-बेस्ड' बिजनेस मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। AI और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियां कम टीम के साथ अधिक काम करने के तरीके खोज रही हैं। भौगोलिक रूप से, टियर-2 और टियर-3 शहरों में 40,000 नौकरियां पहुंचना यह बताता है कि कंपनियां अब बड़े महानगरों के साथ-साथ लागत कम करने वाले छोटे शहरों की ओर भी रुख कर रही हैं। निवेशकों को अब तिमाही वेज बिल और एट्रिशन रेट पर कड़ी नजर रखनी होगी।
