India के टेक्नोलॉजी सेक्टर में Q1 FY27 में 80 सौदों के साथ 18% की बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, बड़ी एक्वीजीशन (Acquisitions) की कमी से कुल डील वैल्यू 35% घटकर **$2.5 बिलियन** हो गई, लेकिन AI और क्लाउड सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी (Private Equity) और स्ट्रैटेजिक मर्जर (Strategic Mergers) मजबूत बने रहे।
टेक्नोलॉजी सेक्टर में बूम
साल 2027 के पहली तिमाही (Q1 FY27) में इंडिया के टेक्नोलॉजी सेक्टर में पिछले एक साल से ज़्यादा समय में सबसे ज़्यादा एक्टिविटी देखी गई। इस दौरान कुल 80 सौदे हुए, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 18% ज़्यादा हैं। वहीं, इन सौदों की कुल वैल्यू घटकर $2.5 बिलियन रह गई, जो पिछली अवधि से 35% कम है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कमी बड़ी और खास डील की संख्या कम होने की वजह से है, न कि निवेशकों की रुचि में कमी के कारण।
M&A और स्ट्रैटेजिक फोकस
इस ग्रोथ में मर्जर और एक्वीजीशन (M&A) का बड़ा रोल रहा, खासकर स्टार्टअप्स के लिए। पिछली तिमाही के मुकाबले 28 डील में $996 मिलियन की बढ़ोतरी के साथ इस सेक्टर में 33% की वॉल्यूम ग्रोथ देखी गई। बड़ी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इंजीनियरिंग में स्पेशलिस्ट फर्म्स को टारगेट कर रही हैं। छह तिमाहियों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं स्टार्टअप एक्वीजीशन, यह दिखाती हैं कि कंपनियां अपनी टेक्निकल क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इनोवेटिव छोटी टीमों को इंटीग्रेट करने पर ज़ोर दे रही हैं।
प्राइवेट इक्विटी और फंडिंग ट्रेंड्स
प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) इन्वेस्टमेंट लिक्विडिटी का एक अहम ज़रिया बने रहे। इस सेक्टर ने 52 डील में $1.5 बिलियन का निवेश आकर्षित किया, जो पिछली तिमाही से 81% ज़्यादा है। इस फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा Nxtra Data के $1 बिलियन जुटाने से आया। बड़े डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा, इन्वेस्टर्स उन एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और SaaS कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो रीकरिंग रेवेन्यू मॉडल दिखाती हैं। Sarvam AI का $83 मिलियन की फंडरेज़ के बाद यूनिकॉर्न बनना, इंडिया के AI-फोकस्ड स्टार्टअप्स में कैपिटल की लगातार रुचि को और मज़बूत करता है।
पब्लिक मार्केट में सुस्ती
प्राइवेट कैपिटल भले ही एक्टिव रहा हो, लेकिन पब्लिक मार्केट्स में थोड़ी नरमी देखी गई। यह तिमाही बिना किसी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) या क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के खत्म हुई, जो Q2 2023 के बाद पहली बार हुआ है। इससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि जहां प्राइवेट इन्वेस्टर्स साफ ग्रोथ पाथ और प्रॉफिट वाले कंपनियों का समर्थन करने में सहज हैं, वहीं पब्लिक मार्केट में नई लिस्टिंग को लेकर ज़्यादा सतर्कता बरती जा रही है।
निवेशकों के लिए, यह माहौल एक ज़्यादा डिसिप्लिन्ड इन्वेस्टमेंट साइकिल की ओर इशारा करता है। अब हाई-वैल्यू, स्पेकुलेटिव डील्स की जगह छोटे, स्ट्रैटेजी-ड्रिवेन सौदों पर फोकस है, जिनका लक्ष्य लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर स्केलिंग है। यह देखना अहम होगा कि क्या यह वॉल्यूम ग्रोथ आने वाली तिमाहियों में टेक्नोलॉजी सर्विस फर्म्स के लिए बेहतर अर्निंग्स में तब्दील होती है और क्या इन प्राइवेट टेक कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी सुधरने पर पब्लिक मार्केट में नई लिस्टिंग का रास्ता खुलता है।
