पूर्व NITI Aayog CEO अमिताभ कांत ने भारत की AI में महारत हासिल करने की रणनीति का खुलासा किया है। अब फोकस बड़े पैमाने पर एप्लिकेशन डेवलपमेंट और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर होगा। देश $200 अरब डेटा सेंटर में निवेश आकर्षित करने और वैश्विक डेटा का 22% योगदान देने की योजना बना रहा है, जिससे भारत एक प्रमुख AI हब बनने की राह पर है। निवेशकों की नजर IT सेवाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्रों पर रहेगी।
भारत AI में कैसे बनेगा ग्लोबल लीडर?
पूर्व NITI Aayog CEO अमिताभ कांत ने 21 अगस्त, 2026 को कहा कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनने की राह पर है। 'BT India@100' इवेंट में कांत ने तर्क दिया कि भारत को AI मॉडल बनाने की सीधी दौड़ में अमेरिका और चीन से मुकाबला करने की बजाय, विभिन्न उद्योगों में AI तकनीक के उपयोग और व्यावहारिक अनुप्रयोगों में महारत हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
डेटा शक्ति और इंफ्रास्ट्रक्चर का बूस्ट
इस रणनीति का मुख्य आधार भारत का विशाल तकनीकी कार्यबल और एक प्रमुख डेटा योगदानकर्ता के रूप में उसकी स्थिति का लाभ उठाना है। अनुमान है कि भारत दुनिया के लगभग 22% डेटा का स्रोत बनेगा, जो AI सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन प्रदान करेगा। इस डेटा को घरेलू स्तर पर प्रोसेस करने के लिए, देश डेटा सेंटर में भारी निवेश देख रहा है, जिसका अनुमान लगभग $200 अरब है। यह निवेश महत्वपूर्ण है ताकि डेटा को विदेशी AI प्लेटफॉर्म द्वारा मोनेटाइज करने के बजाय भारत में ही प्रोसेस किया जा सके।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
AI पर 'एप्लिकेशन-फर्स्ट' (Application-First) के इस फोकस से भारतीय IT सेवाओं (IT Services) की कंपनियों पर खास असर पड़ने वाला है। वे पहले से ही हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में AI टूल्स को इंटीग्रेट करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं। डेटा सेंटरों का विस्तार इंफ्रास्ट्रक्चर, कूलिंग टेक्नोलॉजी और पावर सप्लाई की मांग बढ़ा रहा है, जो कंस्ट्रक्शन, रियल एस्टेट और एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी कंपनियों को प्रभावित करेगा।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि, AI इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ाने में कुछ जोखिम भी हैं। बड़े पैमाने पर बिजली और पानी की खपत से स्थानीय संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है। एक और जोखिम तकनीकी निर्भरता का है। अगर भारत सिर्फ विदेशी कंपनियों के लिए डेटा और एप्लिकेशन डेवलपमेंट का जरिया बनता है, तो आर्थिक लाभ सीमित हो सकता है। इसलिए, स्थानीय रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) को बढ़ावा देना ज़रूरी है ताकि भारत अपने डिजिटल इनोवेशन से मूल्य प्राप्त कर सके।
टैलेंट गैप और भविष्य की राह
एक बड़ी चिंता टैलेंट गैप (Talent Gap) की है। मशीन लर्निंग इंजीनियर्स और डेटा साइंटिस्ट्स की मांग मौजूदा सप्लाई से कहीं ज्यादा है। इस कमी से टेक कंपनियों की वेज कॉस्ट बढ़ सकती है। अगर एजुकेशन और स्किलिंग प्रोग्राम तेजी से नहीं सुधरते हैं, तो AI-संचालित विकास धीमा पड़ सकता है।
इस पहल की सफलता सरकार और निजी क्षेत्र द्वारा इन इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। निवेशक बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स, घरेलू डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रगति और डेटा प्राइवेसी व AI रेगुलेशन से जुड़े नीतिगत बदलावों पर नजर रखेंगे। यही कारक तय करेंगे कि भारत अपने डेटा और मानव पूंजी के लाभ को स्थायी आर्थिक मूल्य में बदल पाता है या नहीं।
