भारत सरकार ने अपने सेमीकंडक्टर मिशन का विस्तार करते हुए 'Semicon 2.0' का रोडमैप पेश किया है। इस प्लान के तहत 2035 तक देश में **3nm** चिप्स बनाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भरता कम की जा सके।
भारत अब ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर एक बड़ा कदम उठा रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'Semicon 2.0' के तहत यह स्पष्ट किया है कि भारत का लक्ष्य मौजूदा 28nm नोड्स से आगे बढ़कर 3nm जैसे एडवांस चिप्स का उत्पादन करना है। यह बदलाव ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की उन कमजोरियों को दूर करेगा जो आज दूसरे देशों पर निर्भर हैं।
वैल्यू चेन को मजबूती
सरकार का फोकस सिर्फ फैब्रिकेशन तक सीमित नहीं है। अब सरकार ऐसे इकोसिस्टम को बढ़ावा दे रही है जहां चिप बनाने में इस्तेमाल होने वाले हाई-प्योरिटी केमिकल्स, गैस और स्पेशलाइज्ड इक्विपमेंट का उत्पादन भी भारत में ही हो सके। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का ढोलेरा प्रोजेक्ट इसमें एक अहम भूमिका निभा रहा है।
देसी मोबाइल और स्टार्टअप्स का जोर
सरकार का टारगेट है कि अक्टूबर 2028 तक पूरी तरह से भारत में डिजाइन और मैन्युफैक्चर होने वाले मोबाइल फोन बाजार में आ जाएं। इसके लिए डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता को कम किया जा सके।
निवेशकों के लिए चेतावनी
सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग एक बेहद कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस है। इसमें निवेश का रिटर्न मिलने में लंबा समय (Long Gestation Period) लगता है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे दिग्गज देशों से मुकाबला करने के लिए भारत को न केवल भारी इन्वेस्टमेंट की जरूरत है, बल्कि टैलेंट और एनर्जी की निर्बाध सप्लाई भी सुनिश्चित करनी होगी। अगर सपोर्टिंग इंडस्ट्रीज के विकास में देरी हुई, तो यह प्रोजेक्ट्स की लागत और टाइमलाइन पर असर डाल सकता है।
