AI Infrastructure: भारत का बड़ा दांव! 2028 तक **3GW** क्षमता का लक्ष्य, **$126 बिलियन** का निवेश

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
AI Infrastructure: भारत का बड़ा दांव! 2028 तक **3GW** क्षमता का लक्ष्य, **$126 बिलियन** का निवेश

भारत ने AI के बढ़ते क्रेज को देखते हुए **2028** तक **3GW** डेटा सेंटर क्षमता हासिल करने की योजना बनाई है। इसके लिए **$126 बिलियन** का भारी-भरकम निवेश आने की उम्मीद है, जो देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

बड़े निवेश और टैक्स में छूट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती डिमांड को देखते हुए भारत अपनी डिजिटल क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है। 2025 के अंत तक देश की क्षमता 1.7 गीगावाट को पार कर चुकी है। इस बड़े विस्तार के लिए $126 बिलियन की निवेश प्रतिबद्धताएं मिली हैं। सरकार ने विदेशी कंपनियों को लुभाने के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे का ऐलान किया है, ताकि बड़े प्रोजेक्ट्स को लंबे समय तक स्थिरता मिल सके।

पावर और नए हब की तलाश

AI इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने के लिए भारी बिजली की जरूरत होती है। भारत ने 2025 में 50% से ज्यादा बिजली नॉन-फॉसिल स्रोतों से पैदा करने का कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके अलावा, एक ही फाइनेंशियल ईयर में 55.3 गीगावाट की नई बिजली क्षमता जोड़ना एक बड़ा मील का पत्थर है। फिलहाल मुंबई इस सेक्टर का मुख्य केंद्र है, जहां देश की लगभग आधी क्षमता मौजूद है। हालांकि, अब धीरे-धीरे अहमदाबाद, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में भी डेटा सेंटर के लिए हलचल तेज हो रही है।

रिस्क और चुनौतियां

इतनी तेज रफ्तार के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। डेटा सेंटर्स के लिए पानी का कुशल प्रबंधन और हाई-लेवल कूलिंग सिस्टम अनिवार्य है, ताकि यूटिलिटी कॉस्ट को कंट्रोल में रखा जा सके। निवेशकों के लिए असली चुनौती यह देखना है कि क्या प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हो पाते हैं या नहीं। ग्रिड कनेक्शन और बिजली के हार्डवेयर की उपलब्धता पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यही भविष्य में कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन और ग्लोबल रेस में उनकी स्थिति तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.