बिजली ग्रिड की अहम टेक्नोलॉजी अब भारत में बनेगी! सरकार का 2029 तक का बड़ा लक्ष्य

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AuthorAditya Rao|Published at:
बिजली ग्रिड की अहम टेक्नोलॉजी अब भारत में बनेगी! सरकार का 2029 तक का बड़ा लक्ष्य

भारतीय बिजली ग्रिड के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) ने 2029 तक SCADA सिस्टम को पूरी तरह से स्वदेशी बनाने का रोडमैप तैयार किया है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव?

फिलहाल, भारत के पावर ग्रिड SCADA सिस्टम में विदेशी तकनीक का हिस्सा 20% से भी कम है। इस निर्भरता के कारण 'वेंडर लॉक-इन' जैसी समस्याएं आती हैं, जिससे मूल सप्लायर की मदद के बिना अपग्रेड या बदलाव करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में, सरकार डिजिटल खतरों को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है, ताकि ग्रिड कंट्रोल सिस्टम देश में ही विकसित और टेस्ट किए जा सकें। CEA की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे कार्यक्रमों का ही एक हिस्सा है, जिसका लक्ष्य राष्ट्रीय ऊर्जा संपत्तियों के लिए एक सुरक्षित और संप्रभु तकनीकी आधार तैयार करना है।

2029 तक की राह

सरकार की योजना में 38 सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और 25 हार्डवेयर कंपोनेंट्स विकसित करना शामिल है। इन सिस्टम्स की लागत में करीब 25% सॉफ्टवेयर और 75% हार्डवेयर का योगदान है, जिसका मतलब है कि हार्डवेयर डेवलपमेंट एक लंबा और महत्वपूर्ण काम होगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, CEA सरकारी फंडिंग, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और ग्रिड इंडिया जैसे बड़े सरकारी खिलाड़ियों के कंसोर्टियम मॉडल, और C-DAC जैसी विशेष तकनीकी एजेंसियों की मदद लेने का प्रस्ताव रखा है। इस रोडमैप में अगले 2 सालों में साइबर सुरक्षा और परिचालन विश्वसनीयता के लिए इन सिस्टम्स को मान्य करने हेतु एक मजबूत टेस्टिंग इकोसिस्टम बनाना भी शामिल है। साथ ही, लोड डिस्पैच सेंटरों में पायलट प्रोजेक्ट भी चलाए जाएंगे।

निवेशकों और सेक्टर के लिए क्या है?

निवेशकों के लिए, यह नीतिगत बदलाव एक संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारत का पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर किस तरह की तकनीक खरीदेगा। इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, ग्रिड कम्युनिकेशन उपकरण और हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं, क्योंकि सरकार स्थानीय भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। सरकार 'पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड' के जरिए इसे समर्थन देने का लक्ष्य रखती है, लेकिन इस बदलाव में महत्वपूर्ण तकनीकी और वित्तीय चुनौतियां हैं। इस पहल की सफलता R&D की गति, मौजूदा वैश्विक प्रणालियों की जटिल कार्यक्षमता को दोहराने की क्षमता और ग्रिड स्थिरता को अप्रभावित रखने वाले परीक्षण प्रोटोकॉल की कठोरता पर निर्भर करेगी।

जिन जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए

निवेशक अच्छी तरह से स्थापित वैश्विक प्रोप्राइटरी प्लेटफॉर्म्स को नए घरेलू विकल्पों से बदलने से जुड़े 'एग्जीक्यूशन रिस्क' पर नजर रख सकते हैं। मुख्य चुनौतियों में एडवांस्ड एनर्जी मैनेजमेंट मॉड्यूल विकसित करने की तकनीकी जटिलता, वैश्विक सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाला परीक्षण इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में लगने वाला समय और नए सिस्टम्स को इंटीग्रेट करते समय संभावित परिचालन बाधाएं शामिल हैं। जैसे-जैसे यह कार्यक्रम आगे बढ़ेगा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक कंपनियों से मैनेजमेंट की टिप्पणियां, साथ ही भविष्य के सरकारी टेंडर्स और फंडिंग अपडेट, इस बदलाव की गति निर्धारित करने में महत्वपूर्ण कारक होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.