भारत सरकार ने Meta (फेसबुक, इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी) के टॉप ग्लोबल एग्जीक्यूटिव्स को समन भेजा है। इसका मकसद बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मटेरियल (CSAM) और कंटेंट मॉडरेशन में बार-बार हो रही गलतियों पर चर्चा करना है। यह मीटिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पोस्ट पर लगी अस्थायी रोक और पेड विज्ञापनों में आपत्तिजनक कंटेंट के मामलों के बाद बुलाई गई है। सरकार जानना चाहती है कि Meta के सिस्टम ठीक से काम क्यों नहीं कर रहे और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
सिस्टम फेलियर पर सख्त सरकार
भारत सरकार Meta Platforms Inc. पर अपनी रेगुलेटरी पकड़ मज़बूत कर रही है। इसके तहत, कंपनी की ग्लोबल लीडरशिप टीम के साथ 5 और 6 अगस्त, 2026 को एक हाई-लेवल मीटिंग तय की गई है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) को Meta के प्लेटफॉर्म्स पर गैर-कानूनी और हानिकारक कंटेंट को रोकने में आ रही दिक्कतों पर गहरी चिंता है। IT सेक्रेटरी एस कृष्णन ने कन्फर्म किया है कि इस मीटिंग में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मटेरियल (CSAM) को ठीक से न हटा पाने और ऑटोमेटेड कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में लगातार हो रही गलतियों पर बात होगी।
क्यों उठाना पड़ा ये कदम?
Meta के ऑटोमेटेड सिस्टम की कमज़ोरियों को उजागर करने वाली कई बड़ी घटनाएं इस समन की वजह बनीं। खास तौर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पोस्ट पर लगी अचानक रोक ने प्लेटफॉर्म के मॉडरेशन एल्गोरिदम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके अलावा, सरकार ने पहले भी इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों में CSAM पाए जाने की बात उठाई थी, जो कंपनी की मैनुअल और ऑटोमेटेड रिव्यू प्रक्रियाओं में बड़ी खामियों की ओर इशारा करता है।
सरकार अपनी ग्लोबल टीम से यह जानना चाहती है कि आखिर ये सिस्टम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन क्यों नहीं कर रहे हैं और क्या मौजूदा सुरक्षा उपाय भारत में यूजर्स को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त हैं। सेक्रेटरी कृष्णन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक ग्लोबल टेक लीडर के तौर पर Meta से उम्मीद की जाती है कि वे मज़बूत और असरदार समाधान पेश करें, खासकर हानिकारक कंटेंट को हटाने और वीआईपी लोगों के वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा के मामले में।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए बड़े संकेत
कंटेंट मॉडरेशन की गलतियों के अलावा, यह मीटिंग Meta के सामने आ रही सिंथेटिक (AI-जनित) जानकारी के बढ़ते चलन की चुनौतियों पर भी केंद्रित होगी। सरकार यह जानना चाहती है कि कंपनी AI-जनित कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए क्या योजना बना रही है, जो सेफ्टी गाइडलाइंस का उल्लंघन कर सकता है।
निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स के लिए, यह डेवलपमेंट भारत में काम कर रहे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते रेगुलेटरी दबाव को दर्शाता है। अनुपालन की लागत (Compliance costs) और बेहतर कंटेंट मॉडरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरतें कंपनी के ऑपरेशनल फोकस का अहम हिस्सा बनी रहेंगी। इन चर्चाओं का नतीजा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए भविष्य के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को प्रभावित कर सकता है, जिससे Meta जैसी कंपनियों के लिए विज्ञापन रेवेन्यू, कंटेंट पॉलिसी और सरकारी संबंधों को मैनेज करने का तरीका बदल सकता है। इंडस्ट्री के लिए अगला बड़ा संकेत यह होगा कि Meta भारतीय रेगुलेटरी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए इन मीटिंग्स के बाद क्या पॉलिसी बदलाव या तकनीकी सुधारों की घोषणा करती है।
