India Smartphone Market: 2026 की पहली छमाही में 10% तक गिर सकती है शिपमेंट्स, लंबी हुई फोन बदलने की अवधि

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Smartphone Market: 2026 की पहली छमाही में 10% तक गिर सकती है शिपमेंट्स, लंबी हुई फोन बदलने की अवधि

भारतीय स्मार्टफोन मार्केट एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उपभोक्ता अब अपने फोन को औसतन **36 महीने** तक इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे **2026** की पहली छमाही में स्मार्टफोन की शिपमेंट्स में लगभग **10%** की गिरावट आने की आशंका है। कंपोनेंट की बढ़ती लागत, खासकर मेमोरी चिप्स की कमी, कीमतों को बढ़ा रही है और डिमांड को कम कर रही है।

क्यों आ रही है गिरावट?

यह मंदी सिर्फ उपभोक्ता की रुचि में कमी के कारण नहीं है, बल्कि लागत के बढ़ते दबाव का नतीजा है। दुनिया भर में मेमोरी कंपोनेंट्स की कमी, जिसे 'मेमफ्लेशन' भी कहा जा रहा है, ने मैन्युफैक्चरर्स के लिए सामग्री की लागत बढ़ा दी है। पहले कंपनियाँ बिक्री की मात्रा बनाए रखने के लिए इन बढ़ी हुई लागतों को खुद वहन कर लेती थीं, लेकिन अब यह संभव नहीं है।

कीमतों में कितनी बढ़ोतरी?

इस सबके चलते, स्मार्टफोन की एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। यह $275 (2025 की पहली छमाही) से बढ़कर $320 (2026 की पहली छमाही) तक जा सकती है। इसका सीधा मतलब है कि भारतीय ग्राहकों के लिए मिड-रेंज फोन ₹3,000 से ₹5,000 तक महंगे हो सकते हैं, वहीं एंट्री-लेवल फोन की कीमत ₹12,000 से ₹14,000 तक पहुंच सकती है।

कंज्यूमर बिहेवियर में बदलाव

टेक्नोलॉजी के परिपक्व होने के साथ, नए फोन मॉडल्स में धीरे-धीरे सुधार हो रहे हैं। बेहतर हार्डवेयर और लंबे सॉफ्टवेयर सपोर्ट के चलते, ग्राहक अब अपने पुराने फोन को जल्दी बदलने की बजाय ज्यादा समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बदलाव खासकर एंट्री-लेवल और मिड-प्राइस सेगमेंट में ज्यादा दिख रहा है, जहाँ कीमत सबसे बड़ा फैक्टर होती है। कई लोग अब नए फोन खरीदने के बजाय रिफर्बिश्ड या सेकेंड-हैंड मार्केट का रुख कर रहे हैं।

ब्रांड्स के लिए नई रणनीति

मार्केट के वॉल्यूम-आधारित ग्रोथ से वैल्यू-आधारित मॉडल की ओर बढ़ने के कारण, कंपनियों को अपनी बिजनेस स्ट्रेटेजी बदलनी पड़ रही है। अब रेवेन्यू बढ़ाने के लिए रैपिड प्रोडक्ट लॉन्च के बजाय, कंपनियाँ अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए प्रीमियम सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रही हैं। IDC का अनुमान है कि 2026 की दूसरी छमाही में शिपमेंट्स में 15% से भी ज्यादा की गिरावट आ सकती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियाँ प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस करने और इन्वेंट्री को मैनेज करने में कितनी कामयाब होती हैं।

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