भारत के स्मार्टफोन बाजार में बड़ी सुस्ती देखी गई है। सितंबर तिमाही में शिपमेंट सालाना आधार पर **26%** गिरकर **3.58 करोड़** यूनिट्स पर आ गया है, जो एक दशक का सबसे निचला स्तर है। कमजोर कंज्यूमर डिमांड और त्योहारी सीजन के बदले पैटर्न ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है।
भारत का स्मार्टफोन बाजार साल 2026 की तीसरी तिमाही में भारी गिरावट से जूझ रहा है। कुल शिपमेंट में 26% की सालाना कमी के साथ यह पिछले एक दशक का सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा है। बढ़ती कीमतों और फोन बदलने की धीमी रफ्तार ने वेंडर्स के लिए इन्वेंट्री और लॉन्च स्ट्रैटेजी को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है।
प्रीमियम सेगमेंट का जलवा, मिड-रेंज पर संकट
बाजार में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। अब ग्राहक कम बजट वाले फोन के बजाय प्रीमियम डिवाइसेस की ओर बढ़ रहे हैं। Samsung ने 19% बाजार हिस्सेदारी के साथ अपनी लीडरशिप बरकरार रखी है, जिसकी मुख्य वजह S26 सीरीज और फोल्डेबल फोन की मजबूत मांग रही। कंपनी ने 67 लाख यूनिट्स की शिपिंग की। वहीं, Apple ने भी 39 लाख यूनिट्स के साथ अपनी जगह बनाए रखी है, जो दर्शाता है कि प्रीमियम अपग्रेड के लिए खरीदार अभी भी खर्च करने को तैयार हैं।
चीनी कंपनियों के लिए चुनौतियां
मिड-रेंज सेगमेंट पर फोकस करने वाली कंपनियों के लिए यह दौर काफी मुश्किल रहा है। Vivo, Xiaomi और Oppo जैसी कंपनियों की वॉल्यूम में 24% से 34% तक की भारी गिरावट देखी गई। इसका असर यह हुआ कि इन चीनी कंपनियों की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी पिछले साल के 75% से घटकर लगभग 68% रह गई है। दिवाली के देरी से आने के कारण भी ऑफलाइन सेल्स में रिकवरी नहीं हो सकी।
इन्वेस्टर्स के लिए अब देखने वाली बात यह है कि क्या आने वाली त्योहारी तिमाही में मांग में सुधार होता है। यदि मांग नहीं बढ़ी, तो कंपनियों को स्टॉक निकालने के लिए भारी डिस्काउंट देना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।
