साल 2026 की दूसरी तिमाही में भारत में स्मार्टफोन की बिक्री में **10%** की भारी गिरावट आई है, जो 2018 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। मेमोरी की बढ़ी कीमतों के चलते कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए, जिससे बजट सेगमेंट में डिमांड पर गहरा असर पड़ा है।
क्यों गिरी स्मार्टफोन की बिक्री?
साल 2026 की दूसरी तिमाही भारतीय स्मार्टफोन इंडस्ट्री के लिए मुश्किल भरी रही। इस दौरान कुल शिपमेंट्स में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 10% की गिरावट दर्ज की गई। यह पिछले छह सालों में जून तिमाही का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। इस गिरावट की मुख्य वजह कंपोनेंट की कीमतों में भारी उछाल है, खासकर मेमोरी की कीमतें सितंबर 2025 के बाद से चार गुना बढ़ गई हैं।
उपभोक्ताओं पर बढ़ी कीमतों का असर
कंपोनेंट की बढ़ी हुई लागत के कारण कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने पड़े। इस साल की पहली छमाही में औसतन 15% तक कीमतों में बढ़ोतरी हुई। इस दाम वृद्धि ने सीधे तौर पर ग्राहकों की खरीदने की क्षमता को प्रभावित किया है। खासकर ₹15,000 से कम कीमत वाले बजट सेगमेंट पर सबसे ज्यादा मार पड़ी, जहां शिपमेंट्स में 45% की साल-दर-साल गिरावट आई। बढ़ती महंगाई के कारण, इस प्राइस रेंज के ग्राहक नए फोन खरीदने में देरी कर रहे हैं।
मार्केट में बड़ा बदलाव और Brands का प्रदर्शन
इस तिमाही के दौरान मार्केट डायनामिक्स में बदलाव देखा गया। चीनी ब्रांड्स, जो आमतौर पर एंट्री- और मिड-रेंज सेगमेंट पर राज करते हैं, उनका कंबाइंड मार्केट शेयर 2020 के बाद जून तिमाही में सबसे निचले स्तर पर आ गया। प्रमुख कंपनियों में, Vivo 18% मार्केट शेयर के साथ अपनी लीड बनाए रखने में कामयाब रहा। Samsung एकमात्र बड़ी कंपनी रही जिसने 2% की ग्रोथ हासिल की, जिसे इसके Galaxy A और फ्लैगशिप S-सीरीज मॉडल्स की स्थिर डिमांड का सहारा मिला। OPPO 14% शेयर के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि Xiaomi (अपने POCO सब-ब्रांड सहित) और realme ने बढ़ी हुई कीमतों की वजह से शिपमेंट वॉल्यूम में गिरावट दर्ज की।
प्रीमियम सेगमेंट में थोड़ी राहत
बजट मार्केट में भारी दबाव के बावजूद, ₹45,000 से ऊपर की कीमत वाले प्रीमियम सेगमेंट में ज्यादा मजबूती दिखी। इस सेगमेंट में बिक्री बनाए रखने के लिए फाइनेंसिंग ऑप्शन और EMI स्कीम्स अहम साबित हुई हैं, जहां आधे से ज्यादा मेनलाइन स्मार्टफोन की खरीदारी फाइनेंसिंग के जरिए हुई। Nothing ने अपने Phone (4a) सीरीज के दम पर 105% की साल-दर-साल ग्रोथ दर्ज की, जो एक बड़ी उपलब्धि है। वहीं, Apple को सप्लाई की दिक्कतों के चलते 3% की गिरावट का सामना करना पड़ा।
आगे की राह
निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि आने वाले महीनों में मेमोरी की कीमतें स्थिर होती हैं या नहीं, क्योंकि यह कंपनियों के लिए मार्जिन बढ़ाने या रिटेल कीमतें घटाने में एक अहम फैक्टर होगा। भविष्य का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि ब्रांड्स सप्लाई चेन की लागतों को कैसे मैनेज करते हैं और क्या फाइनेंसिंग की उपलब्धता प्रीमियम और मिड-रेंज सेगमेंट में बिक्री को सहारा देना जारी रखती है, खासकर तब जब इंडस्ट्री पूरे साल में शिपमेंट्स में 13% की गिरावट का अनुमान लगा रही है।
