भारत का स्मार्टफोन बाजार जून 2026 की तिमाही में पिछले साल की तुलना में **10%** गिर गया है, जो पिछले 6 सालों का सबसे निचला स्तर है। मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों ने **15%** तक दाम बढ़ा दिए, जिससे सस्ते फोन की मांग कम हो गई।
क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
भारत के स्मार्टफोन बाजार में जून तिमाही में पिछले 6 सालों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कुल शिपमेंट्स पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 10% कम रहे। इस बड़ी मंदी का मुख्य कारण कंपोनेंट की कीमतों में भारी बढ़ोतरी है।,
मेमोरी चिप्स की कीमतें सितंबर 2025 से चार गुना तक बढ़ गई हैं, जो डिवाइस बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पार्ट हैं। इन बढ़ती लागतों के चलते फोन बनाने वाली कंपनियों (OEMs) को ग्राहकों पर बोझ डालना पड़ा है, और डिवाइस की औसत कीमतें करीब 15% तक बढ़ गई हैं।
सबसे ज्यादा मार 'सस्ते' फोन पर
कीमतें बढ़ने का सबसे बुरा असर ₹15,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स पर पड़ा है। ऐसे फोन्स की शिपमेंट्स में सालाना 45% की भारी गिरावट आई है। इससे पता चलता है कि कीमत के प्रति संवेदनशील ग्राहक अपने पुराने फोन को ही लंबे समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं। यह ट्रेंड एंट्री-लेवल मार्केट में हाई-वॉल्यूम बिक्री पर निर्भर कंपनियों के लिए मुश्किल खड़ी कर रहा है।
मार्केट लीडर्स का हाल
इस इंडस्ट्री की मंदी के बावजूद, बड़े प्लेयर्स के बीच कॉम्पिटिशन कड़ा बना हुआ है। vivo 18% मार्केट शेयर के साथ टॉप पर बना हुआ है, लेकिन उसे भी बाकी कंपनियों की तरह मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। Samsung टॉप 5 में एकमात्र बड़ी कंपनी रही जिसने 2% की सकारात्मक ग्रोथ दर्ज की। इसके Galaxy A सीरीज और फ्लैगशिप मॉडल्स की मांग ₹15,000–₹20,000 के प्राइस सेगमेंट में बनी रही।
वहीं, दूसरी ओर Xiaomi (अपने POCO ब्रांड सहित) और realme दोनों की शिपमेंट्स में गिरावट आई। OPPO ने प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस करके 14% मार्केट शेयर बनाए रखा। Apple की शिपमेंट्स 3% घटीं और उसने 7% मार्केट शेयर हासिल किया, जबकि सप्लाई चेन में दिक्कतें बनी रहीं।
आगे का क्या है अनुमान?
बड़े प्लेयर्स के दबाव झेलने के बावजूद, कुछ छोटी कंपनियों ने ग्रोथ दिखाई। Nothing ने अपने Phone (4a) के लॉन्च के दम पर 105% की जबरदस्त शिपमेंट ग्रोथ दर्ज की, जबकि Google ने अल्ट्रा-प्रीमियम सेगमेंट में 68% की ग्रोथ हासिल की। यह दिखाता है कि भले ही आम बाजार दबाव में है, लेकिन खास और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग अब भी बनी हुई है।
भविष्य की बात करें तो, एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि 2026 के बाकी हिस्सों में भी इंडस्ट्री पर दबाव बना रहेगा। कंपोनेंट की कीमतों में तत्काल नरमी के संकेत नहीं दिख रहे हैं, ऐसे में इंडस्ट्री एनालिस्ट्स अब पूरे कैलेंडर ईयर 2026 के लिए 13% की सालाना गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं। निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि अगर त्योहारी सीजन में ग्राहकों की मांग ठीक नहीं होती है, तो कंपनियां अपने इन्वेंटरी लेवल और प्रॉफिट मार्जिन को कितनी अच्छी तरह मैनेज कर पाती हैं।
