भारत का स्मार्टफोन मार्केट अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 10% सिकुड़ गया है। इसकी मुख्य वजह बजट सेगमेंट के स्मार्टफोन्स की बिक्री में 45% की भारी गिरावट है। हालांकि, आसान फाइनेंसिंग के चलते हाई-एंड स्मार्टफोन्स ने अपना दबदबा बनाए रखा, पर बढ़ते कंपोनेंट कॉस्ट का असर अब आम ग्राहकों पर भी दिख रहा है।
Detailed Coverage
बजट स्मार्टफोन्स की बिक्री में आई भारी कमी
साल 2026 की दूसरी तिमाही में भारतीय स्मार्टफोन बाजार के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर रहा, जिसमें पिछले साल के मुकाबले कुल शिपमेंट्स में 10% की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण ₹15,000 से कम कीमत वाले बजट सेगमेंट के स्मार्टफोन्स की बिक्री में 45% की भारी कमी रही। यह दिखाता है कि कैसे कीमत के प्रति संवेदनशील ग्राहक अब अपने डिवाइस अपग्रेड को टाल रहे हैं।
बढ़ते कंपोनेंट कॉस्ट का असर
बजट स्मार्टफोन की बिक्री में आई इस भारी कमी के पीछे इंडस्ट्री में एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) में 15% की बढ़ोतरी मुख्य वजह है। कंपोनेंट्स, खासकर मेमोरी चिप्स की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है, जो सितंबर 2025 से लगभग चार गुना तक बढ़ गए हैं। इन बढ़ते इनपुट कॉस्ट्स के चलते कंपनियों को अपने डिवाइसेज की रिटेल प्राइस बढ़ानी पड़ी है, जिससे ये आम ग्राहकों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए, कई कंपनियां 5G पोर्टफोलियो के साथ 4G हैंडसेट की नई रेंज भी पेश कर रही हैं, ताकि कम कीमत पर डिमांड को बढ़ाया जा सके।
प्रीमियम सेगमेंट में फाइनेंसिंग का सहारा
मास-मार्केट की मुश्किलों के विपरीत, प्रीमियम सेगमेंट अपेक्षाकृत स्थिर रहा। इसका मुख्य कारण कंज्यूमर क्रेडिट की आसान उपलब्धता है। आंकड़ों के मुताबिक, मेनस्ट्रीम रिटेल आउटलेट्स से बिकने वाले 50% से अधिक स्मार्टफोन ईएमआई (EMI) या एनबीएफसी (NBFC) की फाइनेंसिंग स्कीम के जरिए खरीदे गए। इस तरह, अपफ्रंट कॉस्ट को कम करके, प्रीमियम कैटेगरी अपनी सेल्स मोमेंटम बनाए रखने में कामयाब रही, भले ही खर्च करने की क्षमता कमजोर बनी हुई है।
प्रमुख ब्रांड्स का प्रदर्शन और रणनीति
इस तिमाही में ब्रांड्स के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला। Vivo ने कुल शिपमेंट्स में गिरावट के बावजूद टॉप मार्केट पोजीशन बनाए रखी। Samsung टॉप 5 वेंडर्स में एकमात्र ऐसी कंपनी रही जिसने 2% की वृद्धि दर्ज की, जो कि उसके A-सीरीज और फ्लैगशिप ऑफर्स की बदौलत संभव हुआ। वहीं, Oppo, Xiaomi और Realme को शिपमेंट्स में गिरावट का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनका मुख्य फोकस मास-मार्केट मॉडल्स पर था, जो वर्तमान अफोर्डेबिलिटी क्राइसिस के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। छोटे प्लेयर्स में, Nothing और Google ने क्रमशः 105% और 68% की शिपमेंट ग्रोथ के साथ ध्यान खींचा है, जो प्रीमियम एंड्रॉइड डिवाइसेज के लिए उपभोक्ता की लगातार बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
Apple के शिपमेंट्स में 3% की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण डिमांड में कमी के बजाय इन्वेंट्री सप्लाई की कमी को बताया गया। आगे की बात करें तो, इंडस्ट्री का अनुमान सतर्क है, और पूरे साल 2026 के लिए स्मार्टफोन शिपमेंट्स में 13% की गिरावट की भविष्यवाणी की गई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपोनेंट प्राइस की अस्थिरता कब कम होती है और कंपनियां अफोर्डेबल सेगमेंट में डिमांड गैप को पूरा करने के लिए अपनी रणनीतियों को कैसे बदल पाती हैं।
