साल 2026 की पहली छमाही में भारतीय बजट स्मार्टफोन बाजार में **65%** की बड़ी गिरावट आई है। मेमोरी कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतों के कारण फोन की कीमतों में **32%** का उछाल देखा गया है, जिससे खरीदार दूर हो रहे हैं।
स्मार्टफोन मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ₹10,000 से कम कीमत वाले एंट्री-लेवल स्मार्टफोन्स की बिक्री में 65% की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण बजट फोन की औसत कीमत में 32% की बढ़ोतरी है, जिसने आम ग्राहकों को खरीदारी से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है।
मेमोरी लागत और मार्जिन पर दबाव
महंगाई का सबसे बड़ा कारण DRAM और NAND चिप्स की बढ़ती कीमतें हैं। ग्लोबल स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स में इन चिप्स की मांग बढ़ने से सप्लाई कम हो गई है। क्योंकि बजट फोन में मेमोरी की लागत का हिस्सा ज्यादा होता है, इसलिए इन पर असर भी अधिक पड़ा है। रुपये की गिरती वैल्यू के कारण भी इंपोर्ट महंगा हो गया है, जिससे कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर गंभीर दबाव बन गया है।
प्रीमियम सेगमेंट में क्रेडिट का सहारा
जहां बजट मार्केट संघर्ष कर रहा है, वहीं ₹20,000 से ऊपर वाले प्रीमियम स्मार्टफोन्स में मजबूती बरकरार है। कंपनियां इसे जीरो-कॉस्ट EMI और आकर्षक एक्सचेंज ऑफर्स के दम पर चला रही हैं। साल 2026 की दूसरी तिमाही में औसत सेलिंग प्राइस बढ़कर $318 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
सप्लाई चेन का खेल और भविष्य की राह
कुछ कंपनियां इस चुनौती को बेहतर तरीके से संभाल रही हैं। उदाहरण के लिए, OnePlus ने अपनी कीमतों में बढ़ोतरी को केवल 8% तक सीमित रखा है, जबकि इंडस्ट्री का औसत 16% रहा है। बेहतर प्लानिंग के कारण OnePlus ने दूसरी तिमाही में 49% की शिपमेंट ग्रोथ हासिल की है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेमोरी चिप्स की सप्लाई का संकट 2028 तक जारी रह सकता है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रीमियम सेगमेंट में क्रेडिट-आधारित डिमांड लंबे समय तक बनी रह पाएगी या नहीं।
