भारत में 4G स्मार्टफोन की मांग फिर से रफ्तार पकड़ रही है। साल 2026 में 4G शिपमेंट में **3%** की बढ़त का अनुमान है, जो 2025 की भारी गिरावट के बाद एक बड़ा बदलाव है। महंगे कॉम्पोनेंट्स के चलते 5G फोन की कीमतें आम आदमी की पहुंच से दूर हो रही हैं, जिससे ग्राहक **₹10,000 से ₹20,000** के बजट वाले फीचर-रिच 4G हैंडसेट्स को चुन रहे हैं।
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। साल 2025 में 4G सेगमेंट की शिपमेंट में 48% की बड़ी गिरावट आई थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। उपभोक्ता अब भविष्य की 5G टेक्नोलॉजी के बजाय आज के बेहतर फीचर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
4G की वापसी के पीछे की वजह
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण कॉम्पोनेंट्स की बढ़ती लागत है। ग्लोबल लेवल पर सेमीकंडक्टर और अन्य पार्ट्स महंगे होने के कारण कंपनियां 5G फोन को बजट रेंज में नहीं उतार पा रही हैं। नतीजा यह है कि ग्राहक उन्हीं पैसों में बेहतर कैमरा, दमदार बैटरी और तेज प्रोसेसर वाले 4G फोन लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
खासकर ₹10,000 से ₹20,000 वाली कैटेगरी में यह ट्रेंड सबसे ज्यादा दिख रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, इस रेंज में 4G मॉडल पेश करने वाली कंपनियों की संख्या पिछले साल सिर्फ 2 थी, जो अब बढ़कर 12 हो गई है।
कंपनियों के लिए चुनौती
Xiaomi, Samsung, Vivo, Realme और Oppo जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह एक 'बैलेंसिंग एक्ट' जैसा है। जहां 5G लॉन्ग-टर्म के लिए जरूरी है, वहीं वॉल्यूम बढ़ाने के लिए कंपनियां 4G मॉडल्स पर जोर दे रही हैं। हालांकि, इसके साथ मार्जिन घटने का रिस्क भी है, क्योंकि प्रीमियम फीचर्स को कम कीमत में देने से कंपनी के मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
मार्केट अनुमानों के अनुसार, 2026 तक कुल स्मार्टफोन शिपमेंट में 4G का हिस्सा 13% तक पहुंच सकता है, जो 2027 में बढ़कर 15% होने की उम्मीद है। साफ है कि 4G अब सिर्फ बजट सेगमेंट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक समझदारी वाली वैल्यू डील बनता जा रहा है।
