Semiconductor Sector: भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में रिकॉर्ड निवेश, फंडिंग पहुंची **$1.4 बिलियन** के पार

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AuthorAditya Rao|Published at:
Semiconductor Sector: भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में रिकॉर्ड निवेश, फंडिंग पहुंची **$1.4 बिलियन** के पार

भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर तेजी से उभर रहा है, जिसमें कुल इक्विटी फंडिंग **$1.4 बिलियन** के स्तर को पार कर गई है। साल **2025** के बाद से इसमें निवेश की रफ्तार काफी तेज हुई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि प्रतिभा की कमी और भारी इंपोर्ट पर निर्भरता जैसे जोखिमों पर नजर रखना जरूरी है।

भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम एक बड़े मुकाम पर पहुंच गया है। सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर में कुल इक्विटी फंडिंग $1.4 बिलियन का आंकड़ा पार कर गई है। यह ग्रोथ इस इंडस्ट्री में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है, जिसमें अब 3,557 से ज्यादा कंपनियां शामिल हैं। डेटा बताते हैं कि निवेशकों का भरोसा इस क्षेत्र पर बढ़ा है, जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुल फंडिंग का करीब आधा हिस्सा यानी $701 मिलियन तो सिर्फ साल 2025 के बाद आया है।

ग्रोथ और प्रमुख हब

इस निवेश का वितरण पूरे देश में एक समान नहीं है। बेंगलुरु इस सेक्टर का निर्विवाद लीडर बना हुआ है, जहां कुल इक्विटी फंडिंग का करीब 40% हिस्सा आता है। इसके अलावा नोएडा, गुरुग्राम, कोच्चि और हैदराबाद भी बड़े हब के रूप में उभरे हैं। सेमीकंडक्टर के पूरे लैंडस्केप में 'इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज' (EMS) सेगमेंट सबसे ज्यादा फंडिंग वाला क्षेत्र रहा है, जिसने 2025 के बाद से $313 मिलियन का कैपिटल जुटाया है। यह मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम हैं।

स्टार्टअप से पब्लिक मार्केट तक का सफर

इंडस्ट्री अब परिपक्व (Maturing) हो रही है। अब तक 281 कंपनियां फंडिंग जुटा चुकी हैं। एग्जिट लैंडस्केप में भी सुधार दिख रहा है, जहां 62 एक्विजिशन और 42 IPO दर्ज किए गए हैं। Tempsens Instruments और Merritronix जैसे हालिया पब्लिक लिस्टिंग इसके उदाहरण हैं। इन एग्जिट्स से प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जो अब Tessolve Semiconductor, ILJIN Electronics और VVDN जैसी कंपनियों में बड़े राउंड्स लगा रहे हैं।

रिस्क और चुनौतियां

फंडिंग बढ़ना अच्छी खबर है, लेकिन निवेशकों को स्ट्रक्चरल रिस्क को नहीं भूलना चाहिए। भारतीय सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री अपनी जरूरतों के 80% से ज्यादा हिस्से के लिए आयात (Imports) पर निर्भर है। यह निर्भरता वैश्विक सप्लाई चेन और भू-राजनीतिक तनावों के प्रति कंपनियों को संवेदनशील बनाती है। इसके अलावा, कुशल डिजाइन प्रतिभा की कमी प्रोजेक्ट्स की लागत और समय को प्रभावित कर सकती है। इसके साथ ही, इस कारोबार में लंबे 'जेस्टेशन पीरियड' की जरूरत होती है, यानी मुनाफा दिखने में अभी काफी समय लग सकता है।

आगे क्या रखें नजर?

इंडस्ट्री अब नई दिल्ली में 17-19 सितंबर को होने वाले 'SEMICON India 2026' के लिए तैयार है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यहां होने वाली पॉलिसी चर्चाओं और पार्टनरशिप्स पर मार्केट की नजर रहेगी। निवेशकों के लिए फिलहाल कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्ट और ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भरता को कम करने की क्षमता पर नजर रखना अहम होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.