सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: अब फैब (Fab) नहीं, डिजाइन पर जोर! ₹1.27 लाख करोड़ का नया प्लान

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AuthorMehul Desai|Published at:
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: अब फैब (Fab) नहीं, डिजाइन पर जोर! ₹1.27 लाख करोड़ का नया प्लान

भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण का ऐलान कर दिया है, जिसमें **₹1.27 लाख करोड़** का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा। इस बार सरकार का फोकस सिर्फ चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों (Fabs) पर नहीं, बल्कि चिप डिजाइन और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर होगा।

क्या है नई नीति में खास?

यूनियन कैबिनेट ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है। इस नई पॉलिसी में सरकार ने पुराने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) के लिए सीधी सब्सिडी नहीं मिलेगी। इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी।

डिजाइन और सहायक कंपनियों पर जोर

नई गाइडलाइंस के तहत, हाई-एंड चिप डिजाइनिंग करने वाली कंपनियों, खासकर 7-नैनोमीटर नोड्स को टारगेट करने वाली कंपनियों को प्रोजेक्ट कॉस्ट का 75% तक सब्सिडी मिल सकती है। इसमें केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें मदद करेंगी। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिए जरूरी केमिकल, गैस और स्पेशलाइज्ड इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों को कैपिटल कॉस्ट पर 30% का इंसेंटिव दिया जाएगा।

मैन्युफैक्चरिंग सब्सिडी में कटौती

सरकार फैब्रिकेशन प्लांट्स (Fabs) को सपोर्ट करना जारी रखेगी, लेकिन सब्सिडी की रकम कम कर दी गई है। सिलिकॉन फैब्स के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर सब्सिडी 50% से घटाकर 40% कर दी गई है। वहीं, अन्य फैब्रिकेशन यूनिट्स, एडवांस्ड पैकेजिंग फैसिलिटीज को 35% और कन्वेंशनल पैकेजिंग यूनिट्स को 25% सब्सिडी मिलेगी।

लक्ष्य और चुनौतियां

सरकार का लक्ष्य 2029 तक घरेलू सेमीकंडक्टर की 70-75% मांग को लोकल डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से पूरा करना है। 2035 तक भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट में एक अहम खिलाड़ी बनाना है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि अब सिर्फ असेंबली पर नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और सप्लाई चेन पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। हालांकि, इस मिशन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्टार्टअप्स और कंपनियां प्राइवेट इक्विटी फंडिंग कितनी जुटा पाती हैं, क्योंकि सरकारी सहायता अक्सर प्राइवेट इन्वेस्टमेंट से जुड़ी होती है। साथ ही, जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी राज्यों को देने से प्रोजेक्ट लागू होने की रफ्तार अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.