Semiconductor Market: भारत बनेगा चिप का पावरहाउस! **$200 बिलियन** तक पहुंचेगा मार्केट का आकार

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Semiconductor Market: भारत बनेगा चिप का पावरहाउस! **$200 बिलियन** तक पहुंचेगा मार्केट का आकार

EY-IESA की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट **$64 बिलियन** से उछलकर साल 2035 तक **$200 बिलियन** के पार पहुंच सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोटिव सेक्टर की बढ़ती मांग इसे नई ऊंचाई देगी।

बड़े अवसर की ओर भारत

EY और IESA की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में यह मार्केट $64 बिलियन रहने का अनुमान है, जो 2035 तक $200 बिलियन तक पहुंच जाएगा। इस तेजी के पीछे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर्स में चिप्स की भारी मांग है।

आयात बिल में भारी उछाल

घरेलू उत्पादन की संभावनाओं को इस बात से समझा जा सकता है कि हमारा इंपोर्ट बिल कितनी तेजी से बढ़ा है। सेमीकंडक्टर का आयात साल 2017 में $5.7 बिलियन था, जो साल 2025 में बढ़कर $30.3 बिलियन पर पहुंच गया है। यह डेटा साफ दिखाता है कि अगर भारत में फैब्रिकेशन और पैकेजिंग की क्षमता बढ़ती है, तो 'इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन' का एक बहुत बड़ा मार्केट तैयार है।

मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग बेस पिछले एक दशक में 6 गुना बड़ा हुआ है। साल 2015 में प्रोडक्शन ₹1.9 लाख करोड़ था, जो 2025 में ₹11.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह आधार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम जैसी इंडस्ट्रीज के साथ चिप मेकर कंपनियों का तालमेल बेहतर होगा।

टैलेंट और रिस्क फैक्टर्स

भारत के पास दुनिया के करीब 20 प्रतिशत चिप डिजाइन इंजीनियर्स का पूल है। हालांकि, लक्ष्य हासिल करना सिर्फ मांग पर निर्भर नहीं है; इसके लिए पॉलिसी सपोर्ट और स्टेबल रेगुलेटरी माहौल जरूरी है। निवेशकों को 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (India Semiconductor Mission) के तहत चल रहे प्रोजेक्ट्स और बड़ी कंपनियों के केपेक्स (Capex) प्लान पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.