भारत ने अपने घरेलू AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए UAE की G42 और Cerebras Systems के साथ हाथ मिलाया है। इंडिया AI मिशन के तहत **8-exaflop** का सुपरकंप्यूटर तैयार किया जा रहा है, ताकि प्राइवेट सेक्टर की कमी को पूरा किया जा सके और **2026** तक **1,00,000 GPU** के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
भारत सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। 'इंडिया AI मिशन' (IndiaAI Mission) के तहत अब एक ऐसा हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्लस्टर बनाया जा रहा है, जिसे पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में रखा जाएगा। यह 8-exaflop की प्रोसेसिंग क्षमता वाला सिस्टम लगभग 10,000 हाई-एंड GPU के बराबर काम करेगा।
क्यों पड़ी इस मिशन की जरूरत?
अभी तक सरकार AI जरूरतों के लिए प्राइवेट क्लाउड प्रोवाइडर्स पर निर्भर थी, लेकिन वैश्विक स्तर पर हार्डवेयर और चिप्स की भारी कमी ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इन चुनौतियों से पार पाने के लिए सरकार अब अपना खुद का सॉवरेन कंप्यूटिंग पूल तैयार कर रही है।
फंड और वित्तीय रणनीति
मार्च 2024 में सरकार ने इस मिशन के लिए ₹10,371.92 करोड़ के आउटले (Outlay) को मंजूरी दी थी। हालांकि, ग्लोबल हार्डवेयर कीमतों में अस्थिरता को देखते हुए सरकार अब एक नया 'नेशनल फ्रंटियर AI एंड कंप्यूट फंड' बनाने पर विचार कर रही है। इसकी वैल्यू ₹15,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ के बीच हो सकती है।
चुनौतियां और भविष्य
इस प्रोजेक्ट के सामने तकनीकी अपग्रेडेशन और भारी बिजली की खपत जैसी चुनौतियां हैं। निवेशकों की नजर अब 'कोंडोर गैलेक्सी इंडिया' (Condor Galaxy India) क्लस्टर के चालू होने पर टिकी है। आने वाले समय में स्टार्टअप्स के लिए सब्सिडी फ्रेमवर्क और नए फंड की मंजूरी इस मिशन की सफलता तय करने वाले अहम फैक्टर होंगे।
