इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने साफ कर दिया है कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के अनुपालन की समय सीमा आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इस फैसले से भारतीय टेक्नोलॉजी और डेटा-केंद्रित कंपनियों को अपनी प्राइवेसी इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी लानी होगी, वरना 2027 तक गैर-अनुपालन पर भारी जुर्माना लग सकता है।
DPDP एक्ट: अब नहीं मिलेगी कोई राहत!
भारत सरकार ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के लागू होने की समय सीमा को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया है। मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इसमें कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा। MeitY सचिव एस. कृष्णन ने हाल ही में स्टार्टअप इंडस्ट्री के लीडर्स को यह बात बताई कि तय की गई समय-सीमाओं का पालन करना ही होगा। उन्होंने कंपनियों से तुरंत अपने डेटा प्राइवेसी फ्रेमवर्क को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।
निवेशकों के लिए चिंता का विषय
नियामक संस्था के इस रुख से भारतीय डिजिटल और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। फिनटेक, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कई सूचीबद्ध और निजी कंपनियां बड़े पैमाने पर यूजर डेटा का इस्तेमाल करती हैं। ऐसे में, उनके लिए अब डेटा प्राइवेसी नियमों का पालन करना कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है।
दो महत्वपूर्ण पड़ाव
कंपनियों को नियामक रोडमैप के दो अहम पड़ावों से गुजरना होगा। पहला, 13 नवंबर 2026 तक 'कंसेंट मैनेजर' (Consent Manager) फ्रेमवर्क को लागू करना होगा। दूसरा और अंतिम पड़ाव 13 मई 2027 तक पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना है, जिसमें नोटिस, सहमति प्रोटोकॉल, सुरक्षा उपाय और डेटा ब्रीच की रिपोर्टिंग शामिल है।
क्या हैं वित्तीय जोखिम?
इस डेवलपमेंट में परिचालन (operational) और वित्तीय जोखिम अहम हैं। कंपनियों को अपने डेटा आर्किटेक्चर को अपग्रेड करने, मजबूत ब्रीच डिटेक्शन सिस्टम लगाने और पर्सनल डेटा को सुरक्षित रूप से संभालने के लिए टीमों को प्रशिक्षित करने में भारी निवेश करना होगा। जो व्यवसाय निर्धारित समय सीमा तक इन वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहते हैं, उन्हें ₹250 करोड़ तक के भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। यह उन फर्मों की लाभप्रदता (profitability) को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है जिनके पास पर्याप्त सिस्टम नहीं हैं।
स्टार्टअप्स की मुश्किलें
हाल की इंडस्ट्री कंसल्टेशन में, स्टार्टअप्स ने कई व्यावहारिक बाधाओं का जिक्र किया है, जैसे यूजर कंसेंट फटीग (consent fatigue) का प्रबंधन करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए डेटा के उपयोग से संबंधित नियमों को स्पष्ट करना। जैसे-जैसे डेडलाइन नजदीक आ रही है, कंपनियों की मुख्य यूजर एक्सपीरियंस को बाधित किए बिना इन बदलावों को लागू करने की क्षमता एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन संकेतक (key performance indicator) होगी।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशक डिजिटल-फर्स्ट कंपनियों की तिमाही वित्तीय रिपोर्ट और मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर नजर रख सकते हैं ताकि वे डेटा प्राइवेसी के लिए अपनी तैयारी की प्रगति को समझ सकें। मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि इन अनुपालन पहलों के लिए कितना खर्च आवंटित किया गया है और ये फर्में DPDP एक्ट की तकनीकी आवश्यकताओं को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा करती हैं, जैसे-जैसे परिचालन समय सीमा करीब आती जा रही है।
