भारत के सेकेंडरी स्मार्टफोन बाजार ने साल 2026 की पहली छमाही में **13%** की ग्रोथ दर्ज की है, जबकि नए स्मार्टफोन्स की बिक्री में **11%** की गिरावट आई है। महंगाई और बढ़ते कॉम्पोनेंट कॉस्ट के कारण ग्राहक अब प्रीमियम रिफर्बिश्ड फोन्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
स्मार्टफोन मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां नए स्मार्टफोन्स की डिमांड कम हो रही है, वहीं रिफर्बिश्ड (पुराने) फोन्स का बाजार तेजी से फल-फूल रहा है। इसका मुख्य कारण मेमोरी और प्रोसेसर जैसे कॉम्पोनेंट्स की बढ़ती कीमतें हैं, जिससे नए बजट मॉडल्स भी महंगे हो गए हैं। ऐसे में ग्राहक कम कीमत में बेहतर फीचर्स और प्रीमियम क्वालिटी के लिए पुराने फोन्स चुन रहे हैं।
ऑर्गनाइज्ड मार्केट का भविष्य
फिलहाल, इस मार्केट का करीब 80% हिस्सा अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर (लोकल शॉप्स) के पास है। केवल 20% मार्केट ही ऑर्गनाइज्ड चैनल्स द्वारा कवर किया गया है। यह बड़ा अंतर उन कंपनियों के लिए एक बड़ा मौका है जो ग्राहकों को पारदर्शिता और क्वालिटी का भरोसा दिला सकती हैं।
दिग्गज ब्रांड्स का दबदबा
इस सेगमेंट में Samsung और Apple का राज है। साल 2026 की पहली छमाही में Samsung ने 30% और Apple ने 23% मार्केट शेयर पर कब्जा जमाया है। इसकी बड़ी वजह इन ब्रांड्स का सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट्स पर भरोसा है, जो पुराने फोन्स को भी लंबे समय तक इस्तेमाल के लायक बनाए रखता है।
आगे की राह और जोखिम
उम्मीद है कि साल 2026 के अंत तक यह सेकेंडरी मार्केट 16% तक बढ़ सकता है। फेस्टिव सीजन में 'ट्रेड-इन' ऑफर्स के चलते इन्वेंट्री बढ़ने की पूरी संभावना है। हालांकि, निवेशकों को महंगाई और सीमित कंज्यूमर स्पेंडिंग जैसे जोखिमों पर नजर रखनी होगी, जो डिमांड को प्रभावित कर सकते हैं।
