केंद्र सरकार देश में डेटा सोवरेनिटी (Data Sovereignty) को सुरक्षित रखने के लिए अब हाइब्रिड AI मॉडल रणनीति को बढ़ावा दे रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्लोबल टेक कंपनियों को संवेदनशील भारतीय डेटा तक पहुंचने से रोकना है।
डेटा पर विदेशी कब्ज़ा रोकने की तैयारी
IT सचिव एस कृष्णन ने साफ कर दिया है कि भारत अब ओपन और प्रोप्राइटरी AI मॉडल के एक संतुलित मिश्रण को अपनाएगा। सरकार को चिंता है कि 'ब्लैक-बॉक्स' कहे जाने वाले प्रोप्राइटरी सिस्टम में संवेदनशील डेटा डालने से वह देश के बाहर जा सकता है या विदेशी कंपनियां बिना अनुमति उसका इस्तेमाल अपने एल्गोरिदम को बेहतर बनाने में कर सकती हैं। हाइब्रिड रणनीति का उद्देश्य डेटा को स्थानीय नियंत्रण (Local Control) में रखना है।
जल्द आएंगे नए रेगुलेटरी नियम
इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, सरकार इस महीने AI रेगुलेशन पर एक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी करने वाली है। इसमें डीपफेक मिटिगेशन, सुरक्षा मानकों और 'ह्यूमन-फर्स्ट' एप्रोच पर बड़ा फोकस होगा। यह नियम सरकारी एजेंसियों और बड़ी कंपनियों के लिए प्रोक्योरमेंट स्टैंडर्ड्स को पूरी तरह बदल सकते हैं, जहाँ परफॉरमेंस से ज्यादा डेटा सिक्योरिटी को प्राथमिकता दी जाएगी।
साइबर रिस्क और कारोबार पर असर
भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी AI से जुड़े साइबर खतरों को वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ा रिस्क माना है। आंकड़े बताते हैं कि भारत की 84% कंपनियों को पहले ही ऐसे अनुभवों का सामना करना पड़ा है जहाँ AI टूल्स ने उनकी पहुंच से बाहर के डेटा को एक्सेस किया। भविष्य में AI से जुड़ी कंप्लायंस लागत बढ़ सकती है, और जो कंपनियां सुरक्षित हाइब्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराएंगी, उनकी मांग बाजार में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
