भारत सरकार अब AI के लिए एक नया 'टेक्नो-लीगल' फ्रेमवर्क तैयार कर रही है, जिसके तहत डेवलपर्स को सुरक्षित सिस्टम बनाने के लिए जवाबदेह बनाया जाएगा। इसके साथ ही, भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अगले 6 महीनों में निवेश की एक नई लहर देखने की उम्मीद कर रहा है, जिसमें अब तक **$23.5 बिलियन** की मदद से **12** प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है।
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश के टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए दो बड़े लक्ष्य तय किए हैं: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए कड़े सुरक्षा मानक लागू करना और डोमेस्टिक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को रफ्तार देना। सरकार अब ऐसे 'टेक्नो-लीगल' ढांचे की ओर बढ़ रही है जो कानूनी जिम्मेदारी और टेक्निकल सेफ्टी को जोड़ता है।
AI डेवलपर्स के लिए बढ़ेगी जवाबदेही
सरकार का मानना है कि ऑटोनॉमस AI सिस्टम स्वतंत्र रूप से काम करते हैं, इसलिए सिर्फ पुरानी परंपराओं से काम नहीं चलेगा। अब डेवलपर्स को अपने मॉडल्स में 'सेफ्टी गार्डरेल्स' पहले से ही तैयार रखने होंगे। यह बदलाव खास तौर पर ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां मामूली गलती से भी भारी नुकसान हो सकता है। इन्वेस्टर्स के लिए संदेश साफ है—आने वाले समय में टेक कंपनियों को सख्त ऑडिट और कंप्लायंस का सामना करना पड़ सकता है।
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का जोर
दूसरी ओर, 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' के तहत सरकार हार्डवेयर सेक्टर में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। पहले फेज में $23.5 बिलियन का कमिटमेंट किया जा चुका है। मंत्रालय के अनुसार, अगले 6 महीनों में चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग में नए कैपिटल फ्लो की उम्मीद है। निवेशकों को सलाह है कि वे सरकारी सलाह-मशविरे और नई पॉलिसी अपडेट्स पर कड़ी नजर रखें, क्योंकि यही भविष्य के टेक ग्रोथ का रोडमैप तय करेंगे।
