Oppo के Reno 5 स्मार्टफोन सीरीज में स्क्रीन डिफेक्ट्स (Screen Defects) की शिकायतों के बाद भारत सरकार का उपभोक्ता मामलों का विभाग (Department of Consumer Affairs) कंपनी की जांच कर रहा है। यह जांच कंपनी पर पहले से चल रहे रेगुलेटरी एक्शन (Regulatory Scrutiny) और वित्तीय अस्थिरता (Financial Instability) की चिंताओं के बीच आई है।
Oppo Reno 5 सीरीज में क्या है गड़बड़?
भारत की शीर्ष उपभोक्ता संरक्षण एजेंसी (Consumer Protection Agency) ने Oppo Reno 5 सीरीज में स्क्रीन खराबियों की रिपोर्टों के बाद जांच शुरू कर दी है। कई यूजर्स ने शिकायत की है कि उनके फोन की स्क्रीन पर लाइनें (Lines) दिखाई दे रही हैं, जिसके बाद उपभोक्ता मामलों के विभाग ने मामले में दखल दिया है। नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (National Consumer Helpline) पर शिकायतों की बढ़ती संख्या के बाद यह जांच शुरू हुई है, जो मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी (Manufacturing Quality) पर चिंताएं बढ़ा रही हैं।
चीनी स्मार्टफोन ब्रांडों पर कसा शिकंजा
यह जांच भारत में चीनी स्मार्टफोन ब्रांडों पर बढ़ते रेगुलेटरी फोकस (Regulatory Focus) का हिस्सा है। हालांकि कुछ यूजर्स को रिप्लेसमेंट (Replacement) की पेशकश की गई है, सरकार यह समझना चाहती है कि क्या ये समस्याएं व्यापक हैं और क्या वे किसी सिस्टमैटिक मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (Systematic Manufacturing Defect) का संकेत देती हैं। उपभोक्ताओं के लिए, इसका नतीजा यह तय कर सकता है कि क्या उन्हें वारंटी अवधि (Warranty Period) के बाद भी मुआवजा (Compensation) या मुफ्त मरम्मत (Free Repairs) मिलेगी।
Oppo की वित्तीय स्थिति और पिछला विवाद
बाजार पर नजर रखने वालों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि Oppo Mobiles India एक प्राइवेट एंटिटी (Private Entity) है और भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों (Indian Stock Exchanges) पर ट्रेड नहीं करती है। हालांकि, कंपनी हाल के वर्षों में अन्य गंभीर मुद्दों के कारण जांच के दायरे में रही है। फाइनेंशियल ईयर 2024 (Financial Year 2024) के अनुसार, ऑडिटर (Auditors) ने कंपनी के ₹3,551 करोड़ के नेगेटिव नेट वर्थ (Negative Net Worth) को उजागर किया, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, कंपनी को डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (Directorate of Revenue Intelligence) द्वारा लगभग ₹4,389 करोड़ के कस्टम ड्यूटी चोरी (Customs Duty Evasion) के कथित मामले में महत्वपूर्ण कानूनी जांच का सामना करना पड़ा है।
आगे क्या?
ये रेगुलेटरी चुनौतियां ऐसे समय में आई हैं जब चीनी स्मार्टफोन निर्माता भारत में अनुपालन (Compliance), फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (Foreign Direct Investment) नियमों और टैक्स फाइलिंग (Tax Filings) के संबंध में कड़ी निगरानी का सामना कर रहे हैं। उद्योग के लिए मुख्य बात यह होगी कि Oppo इन उपभोक्ता शिकायतों से कैसे निपटता है और क्या इससे व्यापक रेगुलेटरी ऑर्डर (Regulatory Orders) जारी होते हैं या मोबाइल निर्माताओं द्वारा वारंटी के बाद डिस्प्ले फेलियर (Display Failures) से निपटने के तरीके के लिए एक मिसाल कायम होती है।
