भारत ने संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के रेडियोकम्युनिकेशन ब्यूरो के डायरेक्टर पद के लिए डॉ. रेवती मन्नेपल्ली को नामित किया है। 2027-2030 के कार्यकाल के लिए होने वाले इस चुनाव में पाकिस्तान का समर्थन भी एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ साबित हो रहा है।
वैश्विक टेलीकॉम में भारत की बढ़ती धमक
भारत अब वैश्विक टेलीकॉम गवर्नेंस में अपनी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस की सीनियर वायरलेस एडवाइजर डॉ. रेवती मन्नेपल्ली को ITU के रेडियोकम्युनिकेशन ब्यूरो के प्रमुख पद के लिए उम्मीदवार बनाना इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है। यह ब्यूरो दुनिया भर में रेडियो-फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम, सैटेलाइट ऑर्बिटल स्लॉट्स और मोबाइल नेटवर्क के मानकों को तय करने वाला सबसे शक्तिशाली निकाय है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पद?
नवंबर 2026 में दोहा, कतर में होने वाला चुनाव भारत के डिजिटल भविष्य के लिए निर्णायक होगा। यह ब्यूरो ही तय करता है कि विभिन्न देश और कंपनियां स्पेस और स्पेक्ट्रम का उपयोग कैसे करेंगी। भारत की कंपनियों, जो सैटेलाइट इंटरनेट और 5G/6G टेक्नोलॉजी में कदम रख रही हैं, उनके लिए यह पद मिलने का सीधा मतलब होगा—सैटेलाइट ऑर्बिट्स तक आसान और निष्पक्ष पहुँच।
रणनीतिक समीकरण और पाकिस्तान का समर्थन
डॉ. मन्नेपल्ली के सामने फ्रांस और जर्मनी के उम्मीदवार हैं। यूरोपीय गुट में दो उम्मीदवार होने से वोटों के बंटने की संभावना है, जिसका फायदा भारत को मिल सकता है। दिलचस्प बात यह है कि इस दौड़ में पाकिस्तान ने भी डॉ. मन्नेपल्ली के समर्थन का संकेत दिया है, जिसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
स्पेस इकोनॉमी का भविष्य
दुनिया भर में Jio और Starlink जैसे प्लेयर्स जिस तरह सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन खड़ा कर रहे हैं, उसके कारण ब्यूरो पर दबाव बढ़ गया है। यह पद संभालने वाली शख्सियत ही तय करेगी कि भविष्य में स्पेस का मैनेजमेंट कैसे होगा। हालांकि, चुनाव की राह में कड़ी लॉबिंग और भू-राजनीतिक (Geopolitical) उतार-चढ़ाव बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। फिलहाल सबकी निगाहें दोहा में होने वाले चुनाव पर टिकी हैं, जहां भारत ITU काउंसिल में दोबारा चुने जाने और 2030 में कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करने का भी लक्ष्य रख रहा है।
