AI Law in India: आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के लिए भारत ला रहा है सख्त कानून, निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
AI Law in India: आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के लिए भारत ला रहा है सख्त कानून, निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

Ministry of Electronics and Information Technology अब AI के लिए एक डेडिकेटेड, रिस्क-बेस्ड फ्रेमवर्क तैयार कर रही है। बैंकिंग और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद है।

भारत सरकार अब आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) को नियंत्रित करने के लिए एक अलग और फॉर्मल कानूनी ढांचा बनाने की तैयारी कर रही है। पहले सरकार मौजूदा IT कानूनों के जरिए काम चला रही थी, लेकिन अब एक 'रिस्क-बेस्ड' अप्रोच को अपनाने का फैसला किया गया है। यह कदम टेक्नोलॉजी के फायदों और उसके साथ आने वाले जोखिमों के बीच संतुलन बनाने के लिए उठाया जा रहा है।

रिस्क के आधार पर नियम

सरकार AI टूल्स को उनके संभावित खतरे के आधार पर बांटेगी। जो टूल्स कम जोखिम वाले हैं, उन पर नियमों की सख्ती कम होगी ताकि इनोवेशन पर कोई बुरा असर न पड़े। हालांकि, बैंकिंग, हेल्थकेयर और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे हाई-रिस्क सेक्टर के लिए कड़े नियम होंगे। इसमें अनिवार्य ऑडिट, ट्रांसपेरेंसी डिस्क्लोजर और जवाबदेही के कड़े पैमाने शामिल किए जा सकते हैं।

कैपिटल मार्केट्स पर प्रभाव

शेयर बाजार में इसका असर सबसे पहले दिखेगा। SEBI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (ML) के इस्तेमाल के लिए खास गाइडलाइन्स बना रहा है। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब एल्गोरिदम पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहा जा सकेगा; 'ह्यूमन-इन-द-लूप' यानी इंसानी निगरानी जरूरी होगी। साथ ही, मार्केट में अस्थिरता आने पर इमरजेंसी 'किल-स्विच' मैकेनिज्म भी लाया जा सकता है, जिससे किसी भी अनहोनी की स्थिति में AI सिस्टम को तुरंत बंद किया जा सके।

निवेशकों की जेब पर कितना असर?

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा अलर्ट 'Compliance Cost' है। जो कंपनियां आज AI का इस्तेमाल क्रेडिट रिस्क मैनेज करने या ट्रेडिंग के लिए कर रही हैं, उन्हें अब गवर्नेंस और एक्सटर्नल ऑडिट पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। बड़ी कंपनियों के लिए इसे झेलना आसान होगा, लेकिन छोटी फर्म्स के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

अभी सरकार की ओर से कंसल्टेशन पेपर्स का इंतजार है, जो 2026 के अंत तक आने की उम्मीद है। तब तक निवेशकों को उन कंपनियों पर नज़र रखनी चाहिए जो ऑटोमेशन पर बहुत अधिक निर्भर हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.