नई दिल्ली में 7 अक्टूबर से 10वें India Mobile Congress (IMC) का आगाज हो रहा है। यह इवेंट 6G और AI-नेटिव इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित है। निवेशकों के लिए 'Viksit Tech 47' के तहत सरकारी नीतियों और टेलीकॉम सेक्टर में नए ग्रोथ अवसरों को समझने के लिए यह एक बड़ा मौका है।
नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में 7 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक होने वाला 10वां India Mobile Congress (IMC) सरकार और प्राइवेट सेक्टर के बीच तालमेल का सबसे बड़ा मंच साबित होगा। इस साल की थीम 'Scale Without Boundaries' है, जिसमें दिग्गज टेलीकॉम कंपनियां और टेक मैन्युफैक्चरर्स 6G तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर मंथन करेंगे।
निवेशकों के लिए क्यों खास है यह इवेंट?
निवेशकों की नजरें खास तौर पर सरकार के 'Viksit Tech 47' विजन पर टिकी हैं। यह पॉलिसी फ्रेमवर्क सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल सुरक्षा में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का रोडमैप है। इस आयोजन में मिलने वाले संकेत भविष्य के सरकारी टेंडर और सब्सिडी के बारे में जानकारी दे सकते हैं, जिसका सीधा असर टेलीकॉम इक्विपमेंट और सॉफ्टवेयर कंपनियों की कमाई (Revenue) पर पड़ेगा।
स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
इवेंट में 'ASPIRE' प्लेटफॉर्म के जरिए 500 से ज्यादा स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने की तैयारी है। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस बढ़ने से उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में घरेलू कंपनियों के पास नए ऑर्डर आएंगे।
सेक्टर की चुनौतियां
हालांकि, सेक्टर के सामने अभी भी बड़ी वित्तीय चुनौतियां हैं। 6G और AI-बेस्ड नेटवर्क के लिए कंपनियों को भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) को बढ़ाना कंपनियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। ग्लोबल सप्लाई चेन की अनिश्चितता और रेगुलेटरी बदलाव भी प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं।
अंत में, यह समिट एक बैरोमीटर की तरह काम करेगा। बाजार यह देखेगा कि कंपनियां नेटवर्क विस्तार के भारी निवेश और लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी के बीच कैसे संतुलन बनाती हैं।
